Union Budget 2023: इस साल बॉन्ड की कीमतों में मजबूती दिख सकती है। इसकी वजह यह है कि लिक्विडिटी में कमी आ रही है। हालांकि, 10 साल के बेंचमार्क बॉन्ड सहित लंबी अवधि के बॉन्ड की यील्ड में स्थिरता दिख सकती है। 10 साल के सरकारी बॉन्ड का भविष्य यूनियन बजट 2023 पर निर्भर करेगा। एक्सिस बैंक के ग्रुप एग्जिक्यूटिव (ट्रेजरी एंड मार्केट्स) नीरज गंभीर का कहना है कि अगर सरकार यूनियन बजट 2023 (Budget 2023) में अपने उधारी कार्यक्रम में किसी तरह का बदलाव नहीं करती है तो यह बॉन्ड बाजार के लिए अच्छी खबर होगी। अगर सरकार फिस्कल कंसॉलिडेशन पर अपना फोकस बनाए रखती है और बाजार से कर्ज लेने का उसका टारगेट इस साल जितना ही बना रहता है तो फिर सब ठीक है। मनीकंट्रोल से बातचीत में गंभीर ने बॉन्ड मार्केट के परिदृश्य को लेकर विस्तार से चर्चा की।
रेपो रेट बढ़ने से बैंकों का कर्ज महंगा हुआ है
गंभीर ने कहा कि बैंक की क्रेडिट ग्रोथ अच्छी रहने की उम्मीद दिख रही है। लेकिन, कंपनियां फंड जुटाने के लिए कॉर्पोरेट बॉन्ड का रास्ता अपना सकती हैं। इसकी वजह यह है कि इंटरेस्ट रेट बढ़ने से बैंक से लोन लेना महंगा हो रहा है। इससे आने वाले महीनों में स्प्रेड बढ़ सकता है। मई में रेपो रेट अचानक बढ़ा दिया गया। उसके बाद से यह कई बार बढ़ाया जा चुका है। सिस्टम में लिक्विडिटी घट रही है। इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी शुरू होने पर म्यूचुअल फंडों की स्कीमों से आउटफ्लो देखने को मिला था।
लंबी अवधि के बॉन्ड की डिमांड बढ़ी
उन्होंने कहा कि इस फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही खासकर अक्टूबर के बाद से हमें पेंशन फंड्स, ईपीएफ और इंश्योरेंस कंपनियों की तरफ से बॉन्ड्स की अच्छी मांग देखने को मिली है। ये सभी लंबी अवधि के लिए इनवेस्ट करना चाहते हैं। यही वजह है कि पिछले 2-3 महीनों में लंबी अवधि के बॉन्ड की सप्लाई अच्छी रही है और यह सप्लाई बहुत जल्द ऑब्जॉर्ब भी हो गई।
बॉन्ड से पैसे जुटाने में बढ़ सकती है दिलचस्पी
इस साल बॉन्ड से पैसे जुटाने में कंपनियों की दिलचस्पी के बारे में पूछने पर गंभीर ने कहा, अब तक कंपनियों की दिलचस्पी बैंक लोन में रही है। इसकी वजह यह है कि बॉन्ड के रास्ते पूंजी जुटाना बैंकों के लोन के मुकाबले महंगा रहा है। लेकिन, उम्मीद है कि आगे दोनों की प्राइसिंग के बीच का अंतर घटेगा। ऐसे में कुछ कंपनियां जो लोन के लिए बैंकों के पास गई थीं, वे फिर से बॉन्ड मार्केट में लौट सकती हैं। एक दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि डॉलर में कर्ज लेना और फिर उसे रुपये में बदलना बहुत महंगा हो गया है। ऐसे में एक कंपनी के लिए डॉलर के बजाय रुपये में बॉन्ड इश्यू करना फायदेमंद है।
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बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड में उछाल की उम्मीद नहीं
सरकारी बॉन्ड यील्ड के बारे में गंभीर ने कहा कि आगे सरकारी बॉन्ड यील्ड के ऊपर जाने की उम्मीद नहीं दिख रही। लेकिन, सरकार अगले बजट में क्या ऐलान करती है, इस पर काफी कुछ निर्भर करेगा। अगर सरकार फिस्कल कंसॉलिडेशन पर अपना फोकस बनाए रखती है और बाजार से कर्ज जुटाने का उसका टारगेट इस साल के मुकाबले ज्यादा बढ़ता या घटता नहीं है तो बाजार के लिए यह अच्छा होगा। मुझे लगता है कि 10 साल के बॉन्ड की यील्ड का 7.5 फीसदी पर जाना मुश्किल होगा।