Union Budget 2023: कोरोना की महामारी ने कुछ सेक्टर को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाया था। उनमें होटल इंडस्ट्री (Hotel Industry) शामिल थी। धीरे-धीरे इस इंडस्ट्री की सेहत सुधर रही है। आर्थिक गतिविधियां फिर से जोर पकड़ने, बिजनेस मीटिंग शुरू होने और लोगों के हॉलीडे पर खर्च करने से होटल इंडस्ट्री की रौनक लौट रही है। बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने वाली इस इंडस्ट्री की अच्छी सेहत जरूरी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को पेश होने वाले बजट में होटल इंडस्ट्री की ग्रोथ बढ़ाने वाले उपाय कर सकती हैं। यह सीतारमण का पांचवां बजट होगा।
प्रमुख उद्योग चैंबर PHDCCI ने इस बारे में सरकार को कुछ सुझाव दिए हैं। चैंबर का मानना है कि इस बार के बजट में होटल पर जीएसटी के रेट्स (GST Rates) को तर्कसंगत बनाने के उपाय हो सकते हैं। कोरोना की महामारी के बाद अब इकोनॉमी की सेहत सुधर रही है।
होटल के कमरों पर मैक्सिमम 12% जीएसटी की सलाह
पीएचडीसीसीआई का कहना है कि सरकार को होटल के कमरों पर जीएसटी रेट मैक्सिमम 12 फीसदी तय करना चाहिए। अभी 7,500 रुपये किराए तक के कमरों पर 12 फीसदी जीएसटी लगता है। 7500 रुपये से ज्यादा किराए वाले कमरों पर जीएसटी का रेट 18 फीसदी है। उद्योग चैंबर का कहना है कि 7,500 रुपये से ज्यादा टैरिफ वाले कमरों के लिए 18 फीसदी जीएसटी खत्म कर देना चाहिए। उन्हें भी 12 फीसदी जीएसटी के दायरे में लाया जाना चाहिए।
टूरिज्म सेक्टर के लिए इंडस्ट्री का दर्जा अनिवार्य
उद्योग चैंबर ने टूरिज्सम सेक्टर को इंडस्ट्री का दर्जा देने की भी मांग की है। सरकार को टूरिज्म से जुड़ी बुनियादी सुविधाएं बनाने के लिए एक टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर फंड बनाना चाहिए। होटल इंडस्ट्री के लाइसेंस और परमिट के एप्रूवल के लिए ई-एप्रूवल की शुरुआत करनी चाहिए। सभी तरह के एप्रूवल के लिए एक समयसीमा तय की जानी चाहिए। अगर समयसीमा के अंदर एप्रूवल नहीं मिलता है तो एप्रूवल मिला हुआ मान लेना चाहिए।
वन कंट्री-वन रोड टैक्स का ऐलान होना चाहिए
पीएचडीसीसीआई ने कहा है कि सरकार को टूरिस्ट ट्रांसपोर्टेशन के लिए वन कंट्री-वन रोड टैक्स की शुरुआत करनी चाहिए। इससे देशभर में रोड ट्रैवल को बढ़ावा मिलेगा। उसने कहा है कि हॉलीडेज और कॉन्फ्रेंस-एग्जिबिशंस पर आने वाले खर्च के टैक्स सेट-ऑफ का प्रोविजन भी बनाया जना चाहिए।