Union Budget 2023: यूनियन बजट 2023 (Budget 2023) से पहले पेट्रोल और डीजल को GST के दायरे में लाने की मांग जोर पकड़ रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे लोगों को काफी फायदा होगा। पेट्रोल और डीजल के रिटेल प्राइसेज बहुत कम हो जाएंगे। पिछले काफी समय से लोगों को पेट्रोल और डीजल के लिए बहुत ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। कई राज्यों में पेट्रोल का प्राइस 100 रुपये प्रति लीटर को पार कर चुका है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी। वह पेट्रोल और डीजल को GST के दायरे में लाने का ऐलान कर सकती हैं।
अभी पेट्रोल-डीजल पर लगते हैं कई तरह के टैक्स
अभी पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर सेंट्रल एक्साइज टैक्स, स्टेट VAT सहित कई तरह के टैक्स लगते हैं। कई तरह के टैक्स लगने से पेट्रोल और डीजल के रिटेल प्राइसेज काफी बढ़ जाते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जीएसटी के दायरे में लाने से ग्राहकों पर टैक्स का बोझ काफी कम हो जाएगा। उनका यह भी कहना है कि इससे इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम करने की भी सुविधा मिलने लगेगी।
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सस्ते ईंधन से लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी होगा फायदा
एक्सपर्ट्स का कहना है कि पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को जीएसटी के दायरे में लाने से आम आदमी को राहत मिलने के अलावा इकोनॉमिक ग्रोथ की रफ्तार बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। दरअसल, सस्ते ईंधन से लॉजिस्टिक्स सेक्टर को फायदा होगा। इस सेक्टर का इकोनॉमिक ग्रोथ में बड़ा योगदान है। इस सेक्टर में रोजगार के मौके पैदा करने की भी काफी क्षमता है।
सरकार ने पिछले साल घटाए थे टैक्स
हालांकि, अब तक GST काउंसिल की तरफ से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को जीएसटी के दायरे में लाने के संकेत नहीं मिले हैं। साल 2021 में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने कहा था कि जीएसटी काउंसिल की 45वीं बैठक में सदस्यों ने पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को जीएसटी के दायरे में नहीं लाने का फैसला किया था। हालांकि, लोगों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले साल पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज टैक्स में कमी की थी। इसके बाद राज्यों ने भी VAT में कमी की थी।
यूक्रेन पर रूस के हमलों के बाद क्रूड में आया था उछाल
पिछले साल फरवरी में यूक्रेन पर रूस के हमलों के बाद क्रूड की कीमतों में उछाल आया था। हालांकि, इंडिया के रूस से सस्ता तेल खरीदने से क्रूड महंगा होने का ज्यादा असर घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर नहीं पड़ा। पिछले साल अक्टूबर में इंडिया के पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के कुल आयात में रूस की हिस्सेदारी बढ़कर 22 फीसदी पर पहुंच गई थी।