Budget 2023: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) अगले वित्त वर्ष 2023-24 का बजट अगले महीने एक फरवरी को पेश करेंगी। सैलरीड और इंडिविजुअल्स की बजट से आस होती है कि वित्त मंत्री टैक्स स्लैब में कुछ राहत देंगी। 60 साल से कम उम्र के टैक्सपेयर्स के लिए अभी 2.5 लाख रुपये तक की आय को टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया है। आखिरी बार टैक्स एग्जेम्प्शन लिमिट में बदलाव वित्त वर्ष 2014-15 में हुआ था जब टैक्स-फ्री इनकम की लिमिट को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये करने का ऐलान किया गया।
अब अगर हाइएस्ट टैक्स स्लैब की बात करें तो पुराने टैक्स सिस्टम के तहत 10 लाख से ऊपर आय पर को 30 फीसदी के टैक्स ब्रेकेट में रखा गया है जबकि नए टैक्स सिस्टम के तहत 15 लाख रुपये से आय को 30 फीसदी के टैक्स ब्रेकेट में रखा गया है।
Highest Tax Slab में भी कई सब-स्लैब
हाइएस्ट टैक्स स्लैब में कई सब-स्लैब की तरह हैं। जैसे कि नए टैक्स सिस्टम की बात करें तो 15 लाख से ऊपर की आय पर 30 फीसदी का टैक्स लगेगा। हालांकि अगर आय 50 लाख रुपये से अधिक है तो 10 फीसदी सरचार्ज, 1 करोड़ रुपये से अधिक है को 15 फीसदी सरचार्ज, 2 करोड़ रुपये से अधिक होने पर 25 फीसदी और 5 करोड़ रुपये से अधिक होने पर 37 फीसदी सरचार्ज है।
वहीं पुराने टैक्स सिस्टम की बात करें तो 10 लाख रुपये से अधिक की इनकम पर 30 फीसदी का टैक्स रेट है। हालांकि अगर 50 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये तक आय है तो 10 फीसदी और 1 करोड़ रुपये से अधिक होने पर 15 फीसदी का सरचार्ज लगेगा।
फाइनल टैक्स में एक और जुड़ता है चार्ज
सिर्फ टैक्स रेट और सरचार्ज के हिसाब से कैलकुलेशन कर टैक्स देनदारी नहीं तय होती है। इसके अलावा हेल्थ और एडुकेशन सेस भी देना होता है। इसे बजट 2018 में सेकंडरी एंड हायर एडुकेशन सेस के स्थान पर लाया गया था। इसकी दर 4 फीसदी है और इसे टैक्स और सरचार्ज पर कैलकुलेट किया जाता है। इसका मतलब हुआ कि स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स निकालकर और अगर सरचार्ज की स्थिति बन रही है तो सरचार्ज इसमें जोड़कर इस अमाउंट के हिसाब से सेस कैलकुलेट किया जाता है। फिर टैक्स, सरचार्ज और सेस जोड़कर फाइनल टैक्स देनदारी तय होती है।