Budget 2023: शेयरखान के गौरव दुआ की राय, बजट में टैक्स स्लैब में हो सकती है कुछ बढ़ोतरी

Budget 2023: इस बजट में वेतनभोगी और मिडल क्लास को राहत देते हुए इनकम टैक्स स्लैब में बढ़ोतरी हो सकती है। सरकार के इस कदम से रेवेन्यू पर पड़ने वाला प्रभाव ज्यादा नहीं होगा। लेकिन देश की एक बहुत बड़ी आबादी को इससे राहत मिलेगी

अपडेटेड Jan 25, 2023 पर 3:59 PM
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इस बजट में पब्लिक सेक्टर की सरकारी कंपनियों के नान-कोर असेट के मॉनिटाइजेशन का प्रस्ताव भी देखने को मिल सकता है

Budget 2023: वित्त वर्ष 2022-23 के तीसरी तिमाही के नतीजों का सीजन अभी तक काफी अच्छा रहा है। अब तक आए नतीजे उम्मीद के मुताबिक ही रहे हैं। इसके साथ ही कई सेक्टरों के डिमांड आउटलुक पर मैनेजमेंट की कमेंट्री काफी अच्छी रही है। ये बातें शेयरखान के गौरव दुआ ने मनीकंट्रोल के साथ हुई बातचीत में कही हैं। इक्विटी और कैपिटल मार्केट का 20 सालों से ज्यादा का अनुभाव रखने वाले गौरव दुआ का मनाना है कि भारता इक्विटी बाजार में आगे तेजी देखने को मिलेगी।

बढ़ सकता है मनरेगा पर होने वाला आबंटन 

आगामी बजट पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार इकोनॉमी को सपोर्ट देने के लिए 5 नीतिगत मुद्दों पर फोकस कर सकती है। पहला ये कि इंफ्रा और कल्याणकारी प्रोजेक्ट्स पर आवंटन बढ़ता नजर आ सकता है। दूसरा, बजट में पीएलआई स्कीम का विस्तार देखने को मिल सकता है। तीसरा ये कि ग्रामीण इकोनॉमी में छाई सुस्ती को देखते हुए मनरेगा पर होने वाला आबंटन बढ़ सकता है। इस बजट में वेतनभोगी और मिडल क्लास को राहत देते हुए इनकम टैक्स स्लैब में बढ़ोतरी हो सकती है। सरकार के इस कदम से रेवेन्यू पर पड़ने वाला प्रभाव ज्यादा नहीं होगा। लेकिन देश की एक बहुत बड़ी आबादी को इससे राहत मिलेगी।


बजट में विनिवेश की गति को बढ़ाने पर होगा फोकस

इसके अलावा इस बजट में पब्लिक सेक्टर की सरकारी कंपनियों के नान-कोर असेट के मॉनिटाइजेशन का प्रस्ताव भी देखने को मिल सकता है। इस बजट में सरकार विनिवेश का कोई बड़ा लक्ष्य रखने की जगह विनिवेश की गति को बढ़ाने पर फोकस करती दिख सकती है।

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थमेगी भारत से विदेशी निवेशकों की निकासी 

क्या भारत से विदेशी संस्थागत की बिकवाली जारी रहेगी। इस सवाल का जवाब देते हुए गौरव दुआ ने कहा कि 2022 में दूसरे ग्लोबल मार्केट की तुलना में भारतीय बाजार के आउटपरफॉर्मेंस के चलते इस समय भारतीय शेयर तुलनात्मक रूप से महंगे नजर आ रहे हैं। हालांकि चाइन की इकोनॉमी खुलने और पिछले कुछ हफ्तों में ग्लोबल इक्विटी मार्केट में आई तेजी के चलते भारतीय बाजारों और दूसरे बाजारों के बीच का अंतर कुछ हद तक भरा है। इसके अलावा भारत दुनिया की सबसे तेजी से ग्रोथ करती इकोनॉमी में बना हुआ है। देश की इकोनॉमी में आगे भी की सलों तक तेजी कायम रहने की उम्मीद है। ऐसे में ऐसा नहीं लगता कि भारत से विदेशी निवेशकों की निकासी इसी तरह से कायम रहेगी।

 

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