Budget 2024: सरकार सड़क, हाइवे और रेलवे पर बढ़ाएगी खर्च? आम लोगों के लिए सर्विस बेहतर करने पर होगा फोकस

Budget 2024 : अक्टूबर और नवंबर में रोड सेक्टर में गतिविधियां सुस्त पड़ी हैं। साल दर साल और महीने दर महीने दोनों ही आधार पर यह सुस्ती दिखी है। फंड्स के अलावा जमीन अधिग्रहण एक बड़ी समस्या रही है। इसका असर सड़क और रेलवे के प्रोजेक्ट्स पर पड़ा है। इसके बावजूद इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि सरकार इस वित्त वर्ष में इंफ्रास्ट्रक्चर पर 10 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च का टारगेट पूरा कर लेगी

अपडेटेड Jan 18, 2024 पर 3:14 PM
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Union Budget 2024 : इस वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में अनुमानित पूंजीगत खर्च का करीब आधा हिस्सा खर्च हो गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के खर्च में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाले सड़क और रेलवे पर करीब 60 फीसदी पैसे खर्च हुए हैं।

Interim Budget 2024 : केंद्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार का फोकस कैपिटल एक्सपेंडिचर पर रहा है। सरकार यूनियन बजट में पूंजीगत खर्च का अनुमान बढ़ाती रही है। वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में पूंजीगत खर्च में साल दर साल आधार पर 37 फीसदी इजाफा किया गया था। सरकार ने इस वित्त वर्ष में पूंजीगत खर्च 10 लाख करोड़ रुपये रहने का टारगेट तय किया है। अंतरिम बजट पेश होने में करीब दो हफ्ते का समय बचा है। वित्तमंत्री Nirmala Sitharaman 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी। यह अंतरिम बजट होगा। वित्त वर्ष 2024-25 का पूर्ण बजट जुलाई में पेश होगा। अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। इसके बाद जो नई सरकार बनेगी, वह अगले वित्त वर्ष का पूर्ण बजट पेश करेगी।

बजट 2024 में क्या सरकार पूंजीगत खर्च का टारगेट बढ़ाएगी?

सवाल है कि क्या सरकार ने इस वित्त वर्ष के लिए पूंजीगत खर्च का जो अनुमान तय किया था, वह पैसा खर्च हो गया है? दूसरा यह कि क्या सरकार अंतरिम बजट में पिछले साल की तरह पूंजीगत खर्च में जबर्दस्त वृद्धि करेगी? सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, इस वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में अनुमानित पूंजीगत खर्च का करीब आधा हिस्सा खर्च हो गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के खर्च में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाले सड़क और रेलवे पर करीब 60 फीसदी पैसे खर्च हुए हैं।


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नवंबर को बाद कंजम्प्शन और पूंजीगत खर्च में सुस्ती के संकेत

सरकार के इस वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में खर्च को देखकर लगता है कि पूंजीगत खर्च कोई बड़ा मसला नहीं है। चिंता की बात यह है कि नवंबर के बाद कंजम्प्शन और पूंजीगत खर्च में सुस्ती देखने को मिली है। कंजम्प्शन कमजोर रहने और ग्रामीण इलाकों में मांग सुस्त रहने का असर मैन्युफैक्चरिंग, कैपेसिटी यूटिलाइजेशन और आखिर में पूंजीगत खर्च पर पड़ेगा। हालांकि, पूंजीगत खर्च पर इसका असर दिखने में थोड़ा समय लगेगा।

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इस वित्त वर्ष में पूजीगत खर्च का टारगेट पूरा होने की उम्मीद

अक्टूबर और नवंबर में रोड सेक्टर में गतिविधियां सुस्त पड़ी हैं। साल दर साल और महीने दर महीने दोनों ही आधार पर यह सुस्ती दिखी है। फंड्स के अलावा जमीन अधिग्रहण एक बड़ी समस्या रही है। इसका असर सड़क और रेलवे के प्रोजेक्ट्स पर पड़ा है। इसके बावजूद इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि सरकार इस वित्त वर्ष में इंफ्रास्ट्रक्चर पर 10 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च का टारगेट पूरा कर लेगी। लेकिन, सरकार वित्त वर्ष 2024-25 के अंतरिम बजट में पूंजीगत खर्च में ज्यादा वृद्धि नहीं करेगी।

पूंजीगत खर्च बढ़ाने में यह है मुश्किल

सरकार के सामने अगले चुनावों से पहले सामाजिक खर्च और फिस्कल डेफिसिट के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। अगर सरकार पूंजीगत खर्च बढ़ाती है तो इसका असर अगले वित्त वर्ष में फिस्कल कंसॉलिडेशन की कोशिशों पर पडे़गा। इससे मध्यम अवधि यानी वित्त वर्ष 2025-26 तक फिस्कल डेफिसिट का 4.5 फीसदी का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो जाएगा।

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