Bank-builder nexus : बैंक-बिल्डर गठजोड़ मामले में CBI का बड़ा एक्शन,  22 मामलों में केस हुए दर्ज

सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बिल्डर-बैंक गठजोड़ मामले में सख्त कदम उठाने की तैयारी पूरी कर ली है। CBI ने 22 मामलों में केस दर्ज किया है। जिसके बाद अगले कुछ दिनों में इनकी औपचारिक जांच शुरू हो जाएगी

अपडेटेड Jul 30, 2025 पर 5:34 PM
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यह पूरा घोटाला सबवेंशन स्कीम के नाम पर हुआ है। इस स्कीम तहत बैंकों ने घर खरीदारों के नाम पर लोन पास किए लेकिन रकम सीधे बिल्डरों के खाते में चली गई

Bank-builder nexus : बैंक और बिल्डर्स गठजोड़ के मामले में CBI ने बड़ी कार्रवाई की है। CBI ने 22 मामलों में केस दर्ज किया है। इसमें सुपरटेक, जेपी इंफ्राटेक और अजनारा इंडिया जैसे बिल्डर्स के नाम शामिल हैं। इस पर ज्यादा डिटेल देते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के असीम मनचंदा ने बताया कि लॉजिक्स सिटी डेवलपर्स और वाटिका का भी इसमें शामिल है। सीबीआई ने इस मामले में दिल्ली-NCR में 47 लोकेशन पर छापेमारी की है। सुप्रीमकोर्ट ने CBI को इस मामले में केस दर्ज करने के निर्देश दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बिल्डर-बैंक गठजोड़ मामले में सख्त कदम उठाने की तैयारी पूरी कर ली है। CBI ने 22 मामलों में केस दर्ज किया है। जिसके बाद अगले कुछ दिनों में इनकी औपचारिक जांच शुरू हो जाएगी। ये मुकदमे नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, यमुना प्राधिकरण और गाजियाबाद क्षेत्र की 80 से अधिक रियल एस्टेट परियोजनाओं को कवर करेंगे।

अभी कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने NCR में घर खरीदारों से हुई धोखाधड़ी करने वाले बिल्डरों और उनके साथ मिलीभगत करने वाले बैंकों के खिलाफ सीबीआई को 22 मुकदमे दर्ज करने की अनुमति दी थी। यह अनुमति उन शुरुआती जांचों के आधार पर दी गई, जिनमें सीबीआई ने संज्ञेय अपराध पाए थे। इससे पहले मार्च 2025 में SC ने पांच प्रमुख मामलों में प्रारंभिक जांच की अनुमति दी थी। जांच एजेंसी ने अदालत को सूचित किया था कि बिल्डरों और वित्तीय संस्थानों द्वारा की गई अनियमितताओं और धोखाधड़ी की पुष्टि हुई है। जिनके चलते आगे की विस्तृत जांच आवश्यक है।


यह पूरा घोटाला सबवेंशन स्कीम के नाम पर हुआ है। इस स्कीम तहत बैंकों ने घर खरीदारों के नाम पर लोन पास किए लेकिन रकम सीधे बिल्डरों के खाते में चली गई। शर्त यह थी कि जब तक बिल्डर फ्लैट का कब्जा नहीं देंगे, तब तक ईएमआई बिल्डर ही चुकाएंगे। लेकिन समय बीतने पर बिल्डरों ने किस्तें देनी बंद कर दीं।

इसके बाद बैंकों ने थर्ड पार्टी कॉन्ट्रैक्ट का हवाला देते हुए खरीदारों को किस्तें जमा करने का नोटिस भेज दिया। कई मामलों में खरीदारों को डिफॉल्टर तक घोषित करने की धमकी दी गई, जबकि उन्हें न तो फ्लैट मिला, न ही कब्जा। इस घोटाले ने हजारों मध्यमवर्गीय परिवारों को आर्थिक रूप से बर्बाद कर दिया।

 

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