Muthoot Finance News: कॉम्पटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) मुथूट फाइनेंस (Muthoot Financa) को शो-कॉज नोटिस भेजा है। मनीकंट्रोल को यह जानकारी सूत्रों के हवाले से मिली है। सूत्र के मुताबिक मुथूट फाइनेंस को यह नोटिस आंकड़ों को गलत तरीके से पेश करने के चलते भेजा गया है। 14 मार्च की तारीख में भेजे गए इस नोटिस में डिबेंचर ट्रस्टियों से जुड़े एक मामले में कंपनी की तरफ से महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज करने पर सवाल उठाया गया है। एक ट्रस्टी का काम आमतौर पर डिबेंचरधारकों के हितों की रक्षा करना, कंपनी के परफॉरमेंस की निगरानी करना, सुरक्षा लागू करना, डिबेंचरधारकों को जानकारी प्रदान करना और डिफॉल्ट के मामले में कानूनी कार्रवाई करना है।
सितंबर 2021 में मुथूट फाइनेंस ने डिबेंचर ट्रस्टीज के खिलाफ शिकायत की थी कि वे मार्केट में अपनी पोजिशन का गलत फायदा उठा रहे हैं और नॉन-कंवर्टिबल डिबेंचर (NCD) जारी करने की सुविधा के लिए अधिक फीस ले रहे हैं। हालांकि इस मामले में जब सीसीआई ने जांच की तो उन्होंने पाया कि मुथूट ने इसी प्रकार की शिकायत बाजार नियामक सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के पास भी की थी लेकिन इसके बारे में सीसीआई को नहीं बताया।
कॉम्पटीशन एक्ट के सेक्शन 45 के तहत सीसीआई अधूरी या झूठी जानकारी देने के मामले में किसी पक्ष को नोटिस भेज सकता है। सूत्र के मुताबिक इस मामले में मुथूट को दूसरी बार नोटिस भेजा गया। इससे पहले जो नोटिस भेजा गया था, उस पर पिछले साल सितंबर 2023 में हाईकोर्ट ऑफ केरल ने स्टे लगा दिया था। कोर्ट ने सीसीआई को मामले में फिर से विचार करने को कहा था। अब सीसीआई ने इसे फिर से नोटिस भेजा है।
कानूनी जानकारों का क्या कहना है
इस मामले में लीगल एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह अनोखा मामला है क्योंकि इसमें इंफॉर्मेंट यानी सूचना देने वाले यानी शिकायत करने वाले को ही नोटिस भेज दिया गया है। सीसीआई के पास एंटी-कॉम्पटीटिव प्रैक्टिसेज में शामिल लोगों की शिकायत करने वालों को इंफॉर्मेंट कहा जाता है। जे सागर एसोसिएट्स के प्रमुख (कॉम्पटीशन प्रैक्टिस) के हेड वैभव चौकसे ने बताया कि मुथूट फाइनेंस इस प्वाइंट पर चूक गई कि सीसीआई के जनरल रेगुलेशंस के रेगुलेशन 10 (2) के तहत इंफॉर्मेंट को अपनी शिकायत से जुड़े सभी लंबित विवादों का खुलासा करना होता है। खास बात ये भी है कि यह मामला अब अधिकार क्षेत्र की लड़ाई में भी बदल गया है। डिबेंचर ट्रस्टियों ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनका कहना है कि सीसीआई के पास इस मामले में सुनवाई का अधिकार ही नहीं है और यह सेबी के दायरे में आता है।