क्या मंदी से निपटने की तैयारी में जुटे दुनिया के बड़े देश? केंद्रीय बैंकों ने खरीदा 1967 के बाद से सबसे अधिक सोना

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने मंगलवार 30 जनवरी को बताया कि सेंट्रल बैंकों ने साल 2022 में कुल 1,136 टन सोना खरीदा है, जिसकी कीमत करीब 70 अरब डॉलर (5.72 लाख करोड़ रुपये) है। यह केंद्रीय बैंकों की ओर से पिछले 55 सालों यानी सन 1967 के बाद से अबतक की सबसे बड़ी गोल्ड खरीदारी है

अपडेटेड Jan 31, 2023 पर 7:48 PM
सेंट्रल बैंकों ने साल 2022 में कुल 1,136 टन सोना खरीदा है

दुनिया के तमाम अर्थशास्त्री साल 2023 में वैश्विक मंदी आने की चेतावनी जता चुके हैं। कई देशों में महंगाई के लगातार ऊंचे स्तर पर बने रहने को भी इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। इस बीच केंद्रीय बैंकों की ओर से भी सोने की रिकॉर्डतोड़ खरीदारी की खबर आ रही है, जो बताता है कि ये देश खुद को आने वाली मंदी के लिए तैयार कर रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने मंगलवार 30 जनवरी को बताया कि सेंट्रल बैंकों ने साल 2022 में कुल 1,136 टन सोना खरीदा है, जिसकी कीमत करीब 70 अरब डॉलर (5.72 लाख करोड़ रुपये) है। यह केंद्रीय बैंकों की ओर से पिछले 55 सालों यानी सन 1967 के बाद से अबतक की सबसे बड़ी गोल्ड खरीदारी है।

साथ ही ये आंकड़ें सोने को लेकर केंद्रीय बैंकों के रुख में बदलाव भी दिखाता है। साल 1990 और 2000 के बाद केंद्रीय बैंकों की ओर से गोल्ड रिजर्व भंडार से सोने बेचने की काफी खबरें आती थी। खासतौर से पश्चिमी यूरोपीय देशों के केंद्रीय बैंकों की ओर से।

हालांकि साल 2008-09 के आर्थिक संकट के बाद से यूरोपीय बैंकों ने सोना बेचना बंद कर दिया। वहीं भारत, रूस, टर्की सहित कई उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों ने सोने की खरीदारी बढ़ा दी।


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सेंट्रल बैंकों की ओर से सोने की खरीदारी बढ़ाने के पीछे मुख्य वजह महंगाई से निपटने की रणनीति है। इसके अलावा महंगाई और आर्थिक संकट जैसी स्थिति में सोना काफी काम आता है। क्योंकि इस दौरान देशों की करेंसी की वैल्यू में गिरावट आ जाती है। जबकि सोने की कीमत आमतौर पर बढ़ जाती है। ऐसे में कोई देश अपनी करेंसी की वैल्यू में बहुत अधिक गिरावट आने पर गोल्ड में विदेशी कर्ज आदि का भुगतान कर सकता है। इसके अलावा गोल्ड से केंद्रीय बैंकों के एसेट्स में विविधता भी आती है।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के एनालिस्ट कृष्ण गोपाल ने कहा, "यह ट्रेंड अभी भी जारी है।" उन्होंने कहा, "आप देख सकते हैं कि पिछले साल भूराजनीतिक मोर्चे और आर्थिक मोर्चे बहुत ज्यादा तनाव, अनिश्चितता और अस्थिरता रही। इन्हीं कारकों के चलते सोने की खरीदारी बढ़ी। आप देख सकते हैं कि इनमें से बहुत से कारक अभी भी बने हुए हैं।"

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