केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) मई के अंत में वित्त वर्ष 2023 के सालाना बजटीय लक्ष्य का 12.3 प्रतिशत रहा। मई में अधिक फिस्कल डेफिसिट रहने के पीछे खर्च को मुख्य वजह बताया जा रहा है। सरकार ने गुरुवार 30 जनवरी को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी। बता दें कि वित्त वर्ष 2022 में इसी अवधि में राजकोषीय घाटा यानी फिस्कल डेफिसिट सालाना बजटीय अनुमान (संशोधित अनुमान) का 8.2 प्रतिशत रहा था।
राजकोषीय घाटा, सरकार के कुल खर्च और आमदनी के बीच अंतर को बताता है। यह उस कर्ज का बताता है जिसे सरकार को घाटे को पूरा करने के लिए लेने की जरूरत होती है।
कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (CAG) के मुताबिक, वास्तविक आधार पर राजकोषीय घाटा मई के अंत में 2,03,921 करोड़ रुपये रहा। मौजदा वित्त वर्ष में देश का राजकोषीय घाटा, जीडीपी के 6.4 फीसदी पर रहने का अनुमान है। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2022 में यह 6.71 फीसदी रहा था।
आंकड़ों के मुताबिक, मई के अंत में सरकार की कुल प्राप्ति (टोटल रिसिप्ट्स) 3.81 लाख करोड़ रुपये रही। यह मौजूदा वित्त वर्ष के बजटीय अनुमान का 16.7 फीसदी है। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में कुल प्राप्ति बजटीय अनुमान का 18 फीसदी रही थी।
मई में सरकार की टैक्स से हुई शुद्ध आमदनी बजटीय अनुमान का 15.9 फीसदी रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष के इसी महीने में यह बजटीय अनुमान का 15.1 फीसदी था।
कर (शुद्ध) राजस्व 2022-23 के बजटीय अनुमान का 15.9 फीसदी रहा। यह 2021-22 में बजटीय अनुमान का 15.1 प्रतिशत था। एक्चुअल टर्म में, वित्त वर्ष 2023 के अप्रैल-मई अवधि के दौरान टैक्स से हासिल शु्द्ध आमदनी 3,07,589 करोड़ रुपये रही।
आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र सरकार का कुल खर्च मई के अंत में 5.85 लाख करोड़ रुपये रहा जो इस साल के बजटीय अनुमान का 14.8 फीसदी है। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह बजटीय अनुमान का 13.7 फीसदी था। वित्त वर्ष 2023 में सरकार का राजकोषीय घाटा 16,61,196 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।