TCS layoffs: सीपी गुरनानी ने कहा-अब 'शोले' के डायलॉग की तरह यह नहीं पूछा जाएगा कि कितने आदमी हैं

CP Gurnani: गुरनानी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से कुछ नौकरियां जा सकती है। लेकिन, ज्यादा नौकरियों के मौके बन सकते हैं। अब बिजनेस मॉडल और आउटपुट के आधार पर किसी आईटी कंपनी का अंदाजा लगाया जाएगा

अपडेटेड Jul 28, 2025 पर 5:05 PM
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टेक महिंद्रा के पूर्व सीईओ सीपी गुरनानी ने कहा कि आज आईटी कंपनियों को ज्यादा AI इंजीनियर्स, ज्यादा साइंटिस्ट्स और प्रॉम्प्ट इंजीनियर्स की जरूरत है।

टेक महिंद्रा के पूर्व सीईओ और आईटी इंडस्ट्री का व्यापक अनुभव रखने वाले सीपी गुरनानी ने टीसीएस के छंटनी के प्लान पर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा है कि एंप्लॉयीज की संख्या के आधार पर आईटी कंपनियों का अंदाजा लगाने का वक्त जल्द खत्म होने जा रहा है। अब बिजनेस मॉडल और आउटपुट के आधार पर किसी आईटी कंपनी का अंदाजा लगाया जाएगा। उन्होंने अपनी बात कहने के लिए मशहूर फिल्म शोले के डायलॉग 'कितने आदमी थे' का उदाहरण दिया।

अब आउटपुट और आउटकम के पैमाने पर कंपनियों को देखा जाएगा

उन्होंने कहा, "शोले के डायलॉग-कितने आदमी थे-की तरह आईटी कंपनियों को एंप्लॉयीज की संख्या के आधार पर जज करने का ट्रेंड अब खत्म होने जा रहा है। हमें आउटपुट और आउटकम-आधारित बिजनेस मॉडल पर फोकस करना होगा। हमें आईटी और सिस्टम्स को देखने की जगह यह देखना होगा कि बिजनेस और ग्राहकों के लिए इसका क्या मतलब है।" टीसीएस के 12,200 एंप्लॉयीज की छंटनी करने के प्लान पर कई एक्सपर्ट्स ने प्रतिक्रिया जताई है।


आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से नौकरियों के नए मौके बनेंगे

गुरनानी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से कुछ नौकरियां जा सकती है। लेकिन, ज्यादा नौकरियों के मौके बन सकते हैं। उन्होंने कहा, "अगर आप इन कंपनियों में नौकरियों के मौकों को देखें तो पिछले साल के इकाबले इनमें इजाफा हुआ है। इसकी वजह यह है कि इन्हें ज्यादा AI इंजीनियर्स, ज्यादा साइंटिस्ट्स, प्रॉम्प्ट इंजीनियर्स और ऐसे लोगों की जरूरत है। इससे कंपनी में कुछ तरह के कामों की जरूरत नहीं रह जाएगी।"

अब कर्मचारियों की बड़ी संख्या का मतलब नहीं रह जाएगा

टेक महिंद्रा के पूर्व सीईओ ने कहा कि एचआर ऑर्गेनाइजेशन का कोई मतलब नहीं है। आखिर में सवाल यह है कि हम अपने एंप्लॉयीज को किस तरह रखते हैं। इसका मतलब है कि कंपनी अब मानवीय मूल्य के साथ डेटा आधारित ऑर्गेनाइजेशन होगी। उन्होने कहा कि टीसीएस के फैसले से यह संकेत मिलता है कि AI का अब मानवीकरण हो रहा है। इसका मतलब है कि कुछ रूटीन नौकरियां खत्म हो सकती है, जबकि कुछ नई नौकिरयों के मौके सामने आ सकते हैं।

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आने वाले दिनों में 10 लाख से ज्यादा नौकरियां खत्म हो जाएंगी

जीटीटी डेटा सॉल्यूशंस के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन गणेश नटराजन ने कहा कि AI के चलते आने वाले दिनों में 10 लाख से ज्यादा नौकरियां खत्म हो जाएंगी। इनमें टेस्टिंग, डॉक्युमेंटेशन और प्रोग्रामिंग जैसे फंक्शन शामिल होंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इसके साथ ही कई नई नौकरियों के मौके बनेंगे। उन्होंने कहा कि हमें बदलाव के कुछ सालों के लिए तैयार रहना होगा। हम लोगों से ट्रांजिशनल एआई से गेम चैलेंजिंग एआई की तरफ जाने की सलाह देते आए हैं। इसका मतलब है कि हमें फ्यूचर आधारित मॉडल पर फोकस करना होगा।

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