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Cyrus Mistry Vs Tata Group Case: टाटा समूह और साइरस मिस्त्री के बीच क्यों शुरू हुआ था विवाद?

Cyrus Mistry ने 2012 में टाटा संस की बागडोर अपने हाथ में ली। इसकी चर्चा न सिर्फ इंडिया में बल्कि दुनियाभर में हुई। लेकिन, मिस्त्री के टाटा संस का चेयरमैन बनने की जितनी चर्चा हुई थी, उससे ज्यादा चर्चा टाटा ग्रुप के साथ उनके विवाद को लेकर हुई

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 05, 2022 पर 11:01 AM
Cyrus Mistry Vs Tata Group Case: टाटा समूह और साइरस मिस्त्री के बीच क्यों शुरू हुआ था विवाद?
बोर्ड के ज्यादातर सदस्यों की सहमित के बाद अक्टूबर 2016 में मिस्त्री को टाटा ग्रुप के चेयरमैन पद से हटा दिया गया। 12 जनवरी, 2017 को टाटा संस ने एन चंद्रशेखर को टाटा संस का नया चेयरमैन नियुक्त कर दिया।

टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन Cyrus Mistry का 4 सितंबर (रविवार) को एक सड़क हादसे में निधन हो गया। दोपहर बाद आई इस खबर ने लोगों को स्तब्ध कर दिया। भारतीय उद्योग जगत ने एक ऐसे व्यक्ति को खो दिया, जिसकी व्यावसायिक सूझबूझ बेमिसाल थी। उनका विजन व्यापक था। वह काम करते थकते नहीं थे। वह भविष्य को गढ़ने वाले बिजनेस लीडर्स में से एक थे।

टाटा समूह ने मिस्त्री के इस टैलेंट को देख उन्हें चेयरमैन बनाने का फैसला लिया था। उन्होंने 2012 में टाटा संस की बागडोर अपने हाथ में ली। इसकी चर्चा न सिर्फ इंडिया में बल्कि दुनियाभर में हुई। इसकी वजह यह है कि टाटा समूह इंडिया का सबसे बड़ा बिजनेस हाउस है। लेकिन, मिस्त्री के टाटा संस का चेयरमैन बनने की जितनी चर्चा हुई थी, उससे ज्यादा चर्चा टाटा ग्रुप के साथ उनके विवाद को लेकर हुई। आखिरकार उन्हें 2016 में इस्तीफा देना पड़ा। क्या था यह विवाद? आखिर दोनों के रिश्तों में कुछ ही साल में इतनी कड़वाहट क्यों आ गई?

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Cyrus Mistry ने रतन टाटा के रिटायरमेंट के बाद टाटा ग्रुप की कमान संभाली थी। टाटा ट्रस्ट्स की Tata Sons में 66 फीसदी हिस्सेदारी है। मिस्त्री फैमिली की टाटा संस में 18.4 फीसदी हिस्सेदारी है। टाटा संस टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है।

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