नोटबंदी (demonetisation) के 7 साल पूरे हो गए हैं। 7 नवंबर, 2016 को सरकार ने 500 रुपये और 1000 रुपये का इस्तेमाल बंद करने का ऐलान किया था। इसका मकसद काले धन के इस्तेमाल को रोकना था। इसके बाद सरकार ने यूनिफायड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पेश किया। इसने इंडिया में पेमेंट को बहुत आसान बनाया है। लोग रोजाना छोटी-बड़ी चीजों के पेमेंट के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। मई 2023 में इंडिया में कुल रिटेल पेमेंट में यूपीआई की हिस्सेदारी 78 फीसदी पहुंच गई। पिछले महीने यूपीआई ट्रांजेक्शन 11.4 अरब पहुंच गया। इसकी कुल वैल्यू 17.6 लाख करोड़ रुपये रही। रोजमर्रा की जिंदगी में यूपीआई और दूसरे डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल बढ़ने के बावजूद इकोनॉमी में कैश सर्कुलेशन बढ़ा है। यह नवंबर 2016 में 17 लाख था, जो अक्टूबर 2023 में बढ़कर 33 लाख रुपये पहुंच पहुंच गया। लोकलसर्किल के एक सर्वे के मुताबिक, पिछले 7 सालों में प्रॉपर्टी खरीदने वाले 76 लोगों ने पेमेंट के एक हिस्से के लिए कैश का इस्तेमाल किया।
सर्वे में 363 जिलों के लोगों ने हिस्सा लिया
लोकलसर्किल के इस सर्वे में 363 जिलों के 44,000 लोगों ने हिस्सा लिया। 10,861 लोगों में से 15 फीसदी ने कहा कि 50 फीसदी से ज्यादा पेमेंट उन्होंने कैश में किया। 18 फीसदी लोगों ने कहा कि कुल पेमेंट में कैश की हिस्सेदारी 30-50 फीसदी थी। 15 फीसदी लोगों ने कहा कि उनके कुल पेमेंट में कैश का हिस्सा 0-10 फीसदी था। सर्वे से यह भी पता चला कि करीब 24 लोगों ने पेमेंट में कैश का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं किया। अगर 2021 के सर्वे के नतीजों से इसकी तुलना की जाए तो पता चलता है कि प्रॉपर्टी से जुड़े ट्रांजेक्शन में कैश का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इसकी वजह यह है कि इस बार सिर्फ 24 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्हें प्रॉपर्टी के पेमेंट में कैश का इस्तेमाल नहीं किया। दो साल पहले 30 फीसदी लोगों ने कहा था कि उन्होंने प्रॉपरी के पेमेंट में कैश का इस्तेमाल नहीं किया था।
26 फीसदी लोग अभी खरीदारी के लिए कैश का करते हैं इस्तेमाल
सर्वे के नतीजे बताते हैं कि 26 फीसदी लोग रोजमर्रा की चीजे खरीदने के लिए अब भी कैश का इस्तेमाल करते हैं। यह पेमेंट बगैर रसीद के होता है। 11,189 लोगों में से सिर्फ 15 फीसदी लोगों ने कहा कि वे कैश ट्रांजेक्शन नहीं करते हैं। 3 फीसदी लोगों ने कहा कि वे इस बारे में बता नहीं सकते। अगर 2021 के सर्वे के नतीजों से तुलना की जाए तो ऐसे लोगों की संख्या थोड़ी बढ़ी है, जो रोजमर्रा की चीजें खरीदने में कैश का इस्तेमाल नहीं करते हैं। दो साल पहले ऐसे लोगों की संख्या 15 फीसदी थी, जो अब घटकर 11 फीसदी पर आ गई है। ये ऐसे लोग हैं जो पेमेंट के लिए पूरी तरह डिजिटल तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।
सर्विसेज के लिए अब भी कैश में हो रहा पेमेंट
पिछले 12 महीनों में खरीदारी के लिए कैश का इस्तेमाल करने वाले 82 फीसदी लोगों ने बताया कि उन्होंने ग्रॉसरी, बाहर खाना खाने और फूड डिलीवरी सर्विसेज के लिए कैश का इस्तेमाल किया है। 7 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्होंने ज्वोलरी, यूज्ड व्हीकल आदि खरीदने के लिए कैश का इस्तेमाल किया है। 4 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्होंने स्मार्टफोन, लैपटॉप जैसे गजेट्स खरीदने के लिए कैश का इस्तेमाल किया है। सर्वे में शामिल अधिकांश लोगों ने कहा कि उन्होंने घरेलू नौकर-नौकरानी, पर्सनल सर्विसेज और होम रिपेयर्स जैसी सेवाओं के पेमेंट के लिए कैश का इस्तेमाल किया है। अब भी ज्यादातर लोग बाल कटवाने, एसी रिपेयर कराने और डोमेस्टिक हेल्प के लिए पेमेंट कैश में करते हैं।