Data Protection Bill Passed: मणिपुर मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के बीच सोमवार को विवादास्पद 'डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल, 2023 (The Digital Personal Data Protection Bill, 2023)' लोकसभा में पारित हो गया। विपक्ष द्वारा उठाए गए गोपनीयता संबंधी चिंताओं के बावजूद डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) विधेयक लोकसभा में ध्वनि मत से पारित हो गया। इस बिल में डेटा उल्लंघनों के लिए कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान है। विपक्ष द्वारा मांगे गए कुछ संशोधन ध्वनि मत से गिर गए। प्रस्तावित कानून को संसदीय पैनल द्वारा जांच के लिए भेजने की मांग के बीच 3 अगस्त को निचले सदन में पेश किया गया था।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने भारतीय नागरिकों की निजता की रक्षा करने के उद्देश्य से 3 अगस्त को लोकसभा में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) विधेयक पेश किया। इसमें व्यक्तियों के डिजिटल डेटा की सुरक्षा करने में विफल रहने या दुरुपयोग करने वाले संस्थानों पर 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
इस विधेयक का उद्देश्य इंटरनेट कंपनियों, मोबाइल ऐप और व्यावसायिक घरानों आदि को गोपनीयता के अधिकार के तहत नागरिकों के डेटा को इकट्ठा करने, उनका भंडारण करने और उसके इस्तेमाल को लेकर अधिक जवाबदेह बनाना है। सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला सुनाते हुए कहा था कि निजता का अधिकार एक मौलिक अधिकार है, जिसके बाद डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल पर काम शुरू हुआ।
सरकार ने पिछले साल अगस्त में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल वापस ले लिया था, जिसे पहली बार 2019 के अंत में पेश किया गया था और उसने नवंबर 2022 में मसौदा विधेयक का एक नया वर्जन जारी किया था। विपक्ष ने इसे समीक्षा के लिए संसदीय समिति को भेजने के लिए कहा था। जैसे ही आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने लोकसभा में विधेयक पेश करने की अनुमति मांगी, कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी नेताओं ने इसका विरोध किया था।
क्या है कांग्रेस की आपत्ति?
सदन में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी और पार्टी सदस्यों मनीष तिवारी एवं शशि थरूर आदि ने विधेयक का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इसमें निजता का अधिकार जुड़ा है और सरकार को जल्दबाजी में यह विधेयक नहीं लाना चाहिए। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि यह विधेयक फिर से संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा जाना चाहिए। तिवारी ने कहा, "डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल को अचानक वित्तीय विधेयक के रूप में कैसे वर्गीकृत किया गया?"
तिवारी ने कहा, "इसे एक नियमित विधेयक माना जाना चाहिए और दोबारा JPC के पास भेजा जाना चाहिए।" पंजाब से सांसद तिवारी ने कहा कि यह कदम डेटा संरक्षण विधेयक को लेकर संसद की संयुक्त समिति द्वारा दो बीजेपी सदस्यों पी पी चौधरी और मीनाक्षी लेखी के नेतृत्व में किए गए प्रयासों का मजाक उड़ाता है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विधेयक पेश करते हुए कुछ सदस्यों की इस धारणा को खारिज कर दिया कि यह एक 'वित्तीय विधेयक' है। उन्होंने कहा कि यह एक सामान्य विधेयक है।
एडिटर्स गिल्ड ने भी जताई चिंता
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी विधेयक के कुछ प्रावधानों पर चिंता व्यक्त करते हुए रविवार को कहा कि ये प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। गिल्ड ने एक बयान में कहा कि यह विधेयक पत्रकारों और उनके सूत्रों सहित नागरिकों की निगरानी के लिए एक सक्षम ढांचा तैयार करता है। गिल्ड ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से विधेयक को संसद की स्थायी समिति के पास भेजने का आग्रह किया है।
गिल्ड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और संसद में राजनीतिक दलों के नेताओं को भी पत्र लिखकर विधेयक पर अपनी चिंताओं से अवगत कराया है। गिल्ड ने कहा कि वह कानून के कुछ दायित्वों से पत्रकारों को छूट नहीं दिए जाने को लेकर काफी चिंतित है, जहां सार्वजनिक हित में कुछ संस्थाओं के बारे में रिपोर्टिंग उनके व्यक्तिगत डेटा संरक्षण के अधिकार के साथ टकराव हो सकती है।