प्रधानमंत्री जन-धन योजना (PMJDY) को लॉन्च हुए करीब 8 साल हो चुके हैं। हालांकि बैंक आज भी इन योजना के तहत खुले खातों की लागत निकालने और इन्हें आर्थिक रूप से व्यवहारिक बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बैंकर्स और एक्सपर्ट्स का कहना है कि कारोबार के नजरिए से जन-धन खातों को चालू रखने की लागत, उनसे मिलने वाले फायदों से अधिक है।
एक सरकारी बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "बैंकों पर एक जन-धन खाते को चालू रखने की सालाना लागत करीब 3,200 से 3,500 रुपये के बीच में बैठती है। आज रखरखाव का अधिकतर काम भले ही टेक्नोलॉजी द्वारा किया जाता, लेकिन सभी नए खाते पर लगने वाले समय और मानवीय हस्तक्षेप एक मुद्दा है।"
उन्होंने कहा, "बैंकों के लिए इन खातों की लागत तभी घट सकती है, जब इन खातों में जमा होने वाली औसत राशि आने वाले महीनों में बढ़े। फिलहाल जन-धन खातों में औसत जमा राशि करीब 3,000 रुपये है। इसके बढ़कर 5 से 6 हजार रुपये तक जाने का अनुमान है, लेकिन यह एक बहुत ही धीमी और लंबी प्रक्रिया है।"
Pradhan Mantri Jan-Dhan Yojana (PMJDY) के तहत खुले बैंक खातों जमा औसत राशि के आंकड़े आप इस ग्राफ में देख सकते हैं-
केंद्र सरकार ने अगस्त 2014 में जन-धन खातों का लॉन्च किया था। इसका मकसद अभी तक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच से दूर रहे लोगों को इससे जोड़ना और उनकी तक किफायती बैंकिंग उत्पादों और सेवाओं को पहुंचाना था।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अभी तक करीब 45.47 करोड़ लोग जन-धन खाते खुलवा चुके हैं और इन खातों में कुल करीब 1.67 लाख करोड़ रुपये शामिल है। इनमें से अधिकतर खाते सरकारी बैंकों में खुले हैं और इसके बाद क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और प्राइवेट सेक्टर बैंकों का स्थान है।
सरकार की सभी डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर स्कीमों, बीमा योजनाओं के लिए एक बैंक खाते की जरूरत होती है। जन-धन योजना ने काफी हद तक सभी व्यस्क भारतीय नागरिकों को बैंक खाता मुहैया कराने के अपने लक्ष्य को हासिल किया है।
हालांकि इस योजना के तहत खुले काफी बैंक खाते निष्क्रिय हैं या उन्हें बेहद कम ट्रांजैक्शन होते हैं। बहुत सारे खातों में काफी कम जमा राशि है। 13 अप्रैल 2022 तक के आंकड़े के मुताबिक, जन-धन खातों में औसत जमा राशि 3,723 रुपये है। वहीं अगस्त 2021 के एक आंकड़े के मुताबिक कुल 43 करोड़ जन-खातों में से सिर्फ 36.89 करोड़ खाते ही सक्रिय थे।