एली लिली अपनी ब्लॉकबस्टर दवा मौनजारो का उत्पादन इंडिया में शुरू कर सकती है। कंपनी के ग्लोबल सीईओ डेविड रिक्स ने इस बारे में कंपनी के प्लान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि कंपनी अपने ग्लोबल एक्सपैंशन प्लान के तहत मौनजारो का उत्पादन इंडिया में करने पर विचार कर सकती है। उन्होंने एक्सक्लूसिव बातचीत में कंपनी के 50 अरब डॉलर के एक्सपैंशन प्लान के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि इस प्लान के तहत कंपनी वजन घटाने और डायबिटीज की दवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाना चाहती है।
दवाओं की बढ़ती मांग पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर
इंडिया में मौनजारो के उत्पादन की संभावनाओं के बारे में पूछने पर रिक्स ने कहा, "यह मुमकिन है। हम दुनिया में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। लोकल उत्पादन और रीजनल सप्लाई चेन के बारे में काफी बातचीत हुई है। चूंकि इंडिया हमारे लिए अहम बाजार बन सकता है, जिससे मौनजारो के बारे में भी हम बदलाव पर विचार कर सकते हैं। इंडिया में संभावनाओं को लेकर हम खुला विचार रखते हैं।" रिक्स ने GLP-1 दवाओं की दुनिया के बड़े बाजारों में कमी की बात मानी। उन्होंने दवाओं की बढ़ती डिमांड पूरी करने के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
एली लिली पहले से इंसुलिन से जुड़े प्रोडक्ट्स का लोकल उत्पादन कर रही है
उन्होंने कहा कि हम इंसुलिन से जुड़े प्रोडक्ट्स की लोकल मैन्युफैक्चरिंग कर रहे हैं। यह काफी सफल रहा है। इसलिए हमें पार्टनर्स से बात करनी पड़ेगी। हमें यह समझना होगा कि मार्केट में किस तरह की डिमांड है। हमें रेगुलेटरी इनवायरमेंट का भी ध्यान रखना होगा। जहां तक मौनजारो की बात है तो मोटापा आज बहुत बड़ी समस्या बन चुका है। यही स्थिति डायबिटीज की है। कोई एक कंपनी अकेले इन दवाओं की डिमांड पूरी नहीं कर सकती।
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ग्लोबल सीईओ ने इंडिया में सरकार के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई
रिक्स ने कहा कि इंडिया में हमारे आने का मकसद कंज्यूमर कम्युनिकेशन के बारे में कुछ टेक प्लेयर्स से बातचीत करना भी है। हम सरकार भी उसके पब्लिक हेल्थ एजेंडा के बारे में बात करना चाहते हैं। हमने देखा है कि प्रधानमंत्री टीवी पर मोटापा और फिटनेस के बारे में बातें करते रहते हैं। यह बहुत अच्छी बात है। यह दिखाता है कि इंडिया डेवलपिंग कंट्री है, लेकिन उनकी समस्याएं डेवलप्ड कंट्री जैसी हैं। मोटापा और क्रोनिक डिजीज इसके उदाहरण हैं। सरकार इस प्रॉब्लम का समाधान चाहती है। इसलिए हम सरकार के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं।