US में बढ़ता इंटरेस्ट FIIs को नहीं लुभा पाया, विदेशी निवेशकों ने इंडिया में 10 सत्रों में किए 3 अरब डॉलर निवेश

FII ने 20 अक्टूबर से 2 नवंबर के बीच इंडियन कंपनियों के शेयरों में 2.74 अरब डॉलर निवेश किए हैं। NSE के प्रोविजनल डेटा के मुताबिक, एफआईआई ने 3 नवंबर को भारतीय शेयर बाजार में करीब 677 करोड़ डॉलर निवेश किए

अपडेटेड Nov 04, 2022 पर 2:00 PM
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1 अक्टूबर से 13 अक्टूबर के बीच Sensex और Nifty में करीब 0.5 फीसदी गिरावट आई थी। लेकिन उसके बाद से दोनों सूचकांक में तेजी का रुख है।

FIIs Investment in India: Foreign Institutional Investors (FII) ने पिछले 10 सत्रों (Sessions) में इंडियन स्टॉक मार्केट में 3 अरब डॉलर इनवेस्ट किए हैं। यह तब है जब अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने आठवीं बार इंटरेस्ट रेट बढ़ाया है। 2 नवबंर को फेडरल रिजर्व ने इंटरेस्ट रेट 0.75 फीसदी बढ़ा दिया।

FII ने 20 अक्टूबर से 2 नवंबर के बीच इंडियन कंपनियों के शेयरों में 2.74 अरब डॉलर निवेश किए हैं। यह जानकारी NSDL के डेटा पर आधारित है। NSE के प्रोविजनल डेटा के मुताबिक, एफआईआई ने 3 नवंबर को भारतीय शेयर बाजार में करीब 677 करोड़ डॉलर निवेश किए हैं।

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फेडरल रिजर्व के चेयरमैन Jerome Powell ने 2 नवंबर को आगे इंटरेस्ट रेट में कम बढ़ोतरी की इनवेस्टर्स की उम्मीदों को तोड़ दिया। उन्होंने इस बात के संकेत दिए कि आगे इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी US Federal Open Market Committee (FOMC) के अनुमान से ज्यादा रहेगी। FOMC के बयान से यह उम्मीद जगी थी कि आगे इंटरेस्ट रेट में ज्यादा बढ़ोतरी देखने को नहीं मिलेगी।

ट्रेडर्स का अब मानना है कि फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का सिलसिला जारी रखेगा। इससे अगले साल मार्च तक यह मौजूदा 3.75-4 फीसदी से बढ़कर 5-5.25 फीसदी तक पहुंच जाएगा। इसका मतलब है कि आगे इसमें 125 बेसिस प्वॉइंट्स की बढ़ोतरी हो सकती है।

इधर, इंडिया में RBI के इनफ्लेशन को 2-6 फीसदी की रेंज में बनाए रखने में नाकाम रहने के बाद माना जा रहा है कि दिसंबर में मॉनेटरी पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट बढ़ सकता है। RBI गवर्नर शक्तिकांत दास पहले ही संकेत दे चुके हैं कि अभी इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का सिलसिला खत्म नहीं हुआ है। हालांकि, RBI की Monetary Policy Committee के सदस्यों का रुख इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी को लेकर एक जैसा नहीं है।

पिछले महीने इंडियन स्टॉक मार्केट में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। लेकिन, पिछले कुछ सेशन से मार्केट में अच्छी तेजी दिख रही है। 1 अक्टूबर से 13 अक्टूबर के बीच Sensex और Nifty में करीब 0.5 फीसदी गिरावट आई थी। लेकिन उसके बाद से दोनों सूचकांक में तेजी का रुख है।

इस बीच, इनवेस्टर्स मार्केट में काफी सावधानी बरत रहे हैं। इसकी वजह है जहां बड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी दिखी है, वही मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं है।

13 अक्टूबर से अब तक BSE Midcap Index 3.5 फीसदी चढ़ा है, जबकि Smallcap Index 2 फीसदी चढ़ा है। इस दौरान कुल 15 सेंशंस में से 11 में सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी आई है। दोनों ही सूचकांकों में इस दौरान 6-6 फीसदी की तेजी आई है।

Sensex 61,000 अंक को छू चुका है, जबकि Nifty 18,000 अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार निकल गया है। अब इंडियन मार्केट के दोनों ही प्रमुख सूचकांक अपने लाइफ-टाइम हाई से सिर्फ 1 फीसदी दूर रह गए हैं। उधर, IPO मार्केच में खूब हलचल देखने को मिल रही है। अब तक आए सितंबर तिमाही के नतीजें भी उम्मीद से बेहतर रहे हैं।

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