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गोमैकेनिक से लेकर ज़ेस्टमनी तक 2023 में बंद हुए हजारों स्टार्टअप्स, जानिए क्या रही वजह

खतरे में पड़े इन स्टार्टअप्स की सूचि में कई गैर-वित्त पोषित स्टार्टअप शामिल हैं। कई दूसरी कंपनियां जिन्होंने बड़े निवेशकों से लाखों रुपए जुटाए हैं वे भी इस सूचि में हैं। उन्होंने अपना कामकाज बंद करने का फैसला लिया है। कुछ नए युग की कंपनियों को नए रेग्यूलेटरी कानूनों की मार पड़ी है। जबकि कई को प्रतिकूल मैक्रोइकोनॉमिक स्थितियों, वित्तीय गड़बड़ी और दूसरे कारणों के चलते कामकाम बंद करना पड़ा है

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 26, 2023 पर 6:15 PM
गोमैकेनिक से लेकर ज़ेस्टमनी तक 2023 में बंद हुए हजारों स्टार्टअप्स, जानिए क्या रही वजह
एक प्राइवेट मार्केट डेटा प्रोवाइडर ट्रैक्सन के मुताबिक डेडपूल स्टार्टअप्स, या बंद होने वाली या बंद होने के कगार पर पहुंच गई कंपनियों की संख्या 2023 में 34,848 थी

निवेशकों ने 2023 में अपनी मुठ्ठी कस ली है  और उन स्टार्टअप्स में चेरी पिकिंग (खराब को छांट कर अच्छे अपने पास रखना) शुरू कर दी जिनमें उन्होंने फंडिंग की थी। नतीजा यह हुआ कि हज़ारों कंपनियों को जो अपने अस्तित्व के लिए पूरी तरह से वेंचर पूंजी पर निर्भर थीं अपनी दुकानें बंद करनी पड़ीं हैं। अन्य को वित्तीय गड़बड़ी या नए नियमों के कारण कामकाज बंद करना पड़ा।

एक प्राइवेट मार्केट डेटा प्रोवाइडर ट्रैक्सन के मुताबिक डेडपूल स्टार्टअप्स, या बंद होने वाली या बंद होने के कगार पर पहुंच गई कंपनियों की संख्या 2023 में 34,848 थी। जबकि 2022 में इस कटेगरी में 18,049 स्टार्टअप थे। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक देश में 1,00,000 से ज्यादा स्टार्टअप हैं। ट्रैक्सन के आंकड़ों इन्ही स्टार्टअप्स से संबंधित हैं।

खतरे में पड़े इन स्टार्टअप्स की सूचि में कई गैर-वित्त पोषित स्टार्टअप शामिल हैं। कई दूसरी कंपनियां जिन्होंने बड़े निवेशकों से लाखों रुपए जुटाए हैं वे भी इस सूचि में हैं। उन्होंने अपना कामकाज बंद करने का फैसला लिया है। कुछ नए युग की कंपनियों को नए रेग्यूलेटरी कानूनों की मार पड़ी है। जबकि की प्रतिकूल मैक्रोइकोनॉमिक स्थितियों/सही प्रोडक्ट मार्कटे में फिट (पीएमएफ) हो पाने में विफलता, वित्तीय गड़बड़ी और दूसरे कारणों के चलते कामकाम बंद करना पड़ा है।

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