पिछले 9 सालों में सरकारी बैंकों का मुनाफा तीन गुना बढ़कर 1.04 लाख करोड़ रुपये हो गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने शनिवार 1 जुलाई को ये जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से किए गए उपायों के चलते ऐसा संभव हुआ है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए आगे भी यही मोमेंटम जारी रहने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2014 में सरकारी बैंकों का मुनाफा 36,270 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2023 में करीब तीन गुना बढ़कर 1.04 लाख करोड़ रुपये हो गया। सीतारमण ने ये बातें नई दिल्ली में पंजाब एंड सिंध बैंक के कॉर्पोरेट कार्यालय के उद्घाटन के मौके पर कहीं।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों को कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े बेस्ट सिद्धांतो का पालन करके अपनी 'उपलब्धियों को आगे बढ़ाने’ की जरूरत है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “बैंकों को आराम से बैठकर सफलता पर जश्न नहीं मनाना चाहिए। उन्हें कॉर्पोरेट गवर्नेंस के नियमों का, नियामकीय मानदंडों का पालन करना चाहिए, विवेकपूर्ण लिक्विडीटी मैनेजमेंट सुनिश्चित करना चाहिए और मजबूत एसेट-लायबिलिटी और रिस्क मैनेजमेंट पर ध्यान देना जारी रखना चाहिए।”
दूर हो गई 'ट्विन-बैलेंस शीट’ की समस्या
उन्होंने कहा कि भारतीय इकोनॉमी में बैंकों और कॉरपोरेट की ‘ट्विन-बैलेंस शीट’ की समस्या अब दूर हो गई है। उन्होंने साथ ही जोड़ा कि मोदी सरकार के ठोस प्रयासों के कारण अब ‘ट्विन-बैलेंस शीट’ का लाभ मिल रहा है।
‘ट्विन-बैलेंस शीट समस्या’ का मतलब है कि एक ही समय में बैंकों और कॉरपोरेट की वित्तीय सेहत में गिरावट होगी। इस स्थिति में कर्ज लेने वाले और देने वाले, दोनों ही तनाव में रहते हैं। दूसरी ओर अगर कर्ज लेने वाले इसे चुकाने की स्थिति में हैं, तो यह ट्विन-बैलेंस शीट से लाभ मिलने की स्थिति होती है।
सीतारमण ने कहा, “मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि सरकार की ओर से उठाए गए तमाम उपायों के चलते ट्विन-बैलेंस शीट की समस्या दूर हो गई हैं। अब रिजर्व बैंक का मानना है कि ट्विन-बैलेंस शीट से भारतीय इकोनॉमी को फायदा मिल रहा है।”
उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से मोदी सरकार ने कई उपाय किए हैं, जिससे सरकारी बैंकों के प्रदर्शन में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि संपत्ति पर रिटर्न, शुद्ध ब्याज मार्जिन और प्रोविजन कवरेज रेशियो जैसे सभी अहम मापदंडों में सुधार हुआ है।