टेलिकॉम डिपार्टमेंट ने रिफॉर्म पैकेज से पहले हुई स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए बैंक गारंटी जमा करने की जरूरत को खत्म कर दिया है। इसे लेकर टेलिकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया (Vodafone Idea) का कहना है कि यह राहत भारत में 4G और 5G निवेश को बढ़ावा देगी। वोडाफोन आइडिया ने एक BSE फाइलिंग में कहा कि इससे पहले रिफॉर्म पैकेज से पहले हुई स्पेक्ट्रम नीलामियों के मामले में हर स्पेक्ट्रम किस्त के लिए, किस्त दिए जाने की तारीख से 13 महीने पहले कंपनी को लगभग 24,800 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी देने की जरूरत थी।
2021 के टेलिकॉम रिफॉर्म पैकेज के अनुसार, रिफॉर्म पैकेज के बाद हुई स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए कोई बैंक गारंटी देने की जरूरत नहीं है। टेलिकॉम डिपार्टमेंट ने 27 दिसंबर, 2024 को जारी एक कम्युनिकेशन में 2012, 2014, 2015, 2016 और 2021 में हुई नीलामी में प्राप्त स्पेक्ट्रम के लिए वित्तीय बैंक गारंटी प्रस्तुत करने की जरूरत को कुछ नियमों और शर्तों के अधीन समाप्त कर दिया है।
2015 की नीलामी के लिए केवल एक बार आंशिक शॉर्टफॉल
वोडाफोन आइडिया ने कहा, "नियमों और शर्तों के बारे में हमारी समझ के अनुसार अब 2012, 2014, 2016 और 2021 की स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए कंपनी की ओर से कोई बैंक गारंटी दिए जाने की जरूरत नहीं होगी, बशर्ते एलोकेशन की तारीख से लेकर अगली किस्त के भुगतान की ड्यू डेट के बाद 3 महीने खत्म होने तक इस्तेमाल किए गए स्पेक्ट्रम की प्रो-रेटेड वैल्यू, टेलिकॉम कंपनी की ओर से एनपीवी बेसिस पर किए गए पेमेंट की वैल्यू से कम हो।" हालांकि, 2015 की नीलामी के लिए केवल एक बार आंशिक शॉर्टफॉल होगा। वोडाफोन आइडिया ने कहा कि वह 2015 की नीलामी के लिए इस आंशिक शॉर्टफॉल का फाइनल अमाउंट तय करने के लिए टेलिकॉम डिपार्टमेंट के साथ चर्चा कर रही है।
कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि बैंक गारंटी में छूट का यह कदम टेलिकॉम इंडस्ट्री को सरकार के लगातार सपोर्ट का एक स्पष्ट संकेत है। यह सुनिश्चित करेगा कि बैंकिंग सिस्टम के एक्सपोजर का इस्तेमाल टेलिकॉम ऑपरेटर्स की ओर से भारत में 4G और 5G नेटवर्क के आगे प्रसार के लिए किया जाए।