नटराजन चंद्रशेखरन (Natarajan Chandrasekaran) ने 21 फरवरी को टाटा संस (Tata Sons) के चेयरमैन के रूप में पांच साल का अपना पहला कार्यकाल पूरा कर लिया। इस महीने की शुरुआत में उन्हें दोबारा टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया। उनका दूसरा कार्यकाल भी पांच साल का होगा। टाटा संस के चेयरमैन के रूप में चंद्रा का कार्यकाल उपलब्धियों से भरा रहा है।
चंद्रा ने टाटा संस के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री से चल रही कानूनी लड़ाई में टाटा ग्रुप को विजय दिलायी। एयर इंडिया के बिडिंग प्रोसेस को सफलतापूर्वक पूरा किया। इससे करीब 6 दशक बाद एयरलाइंस कंपनी फिर से टाटा ग्रुप का हिस्सा बनी। बिग बास्केट और 1एमजी का अधिग्रहण कर टाटा ग्रुप को डिजिटल शॉपिंग की प्रमुख खिलाड़ी बनाने की कोशिश की।
मनीकंट्रोल ने एचडीएफसी (HDFC) के चेयरमैन दीपक पारेख (Deepak Parekh) और आरपीजी एंटरप्राइजेज (RPG Enterprises) के चेयरमैन हर्ष गोयनका (Harsh Goyanka) से टाटा संस के चेयरमैन के रूप में चंद्रा के पहले कार्यकाल के बारे में बातचीत की। दोनों ने चंद्रा को लेकर काफी उत्साहित नजर आए। पारेख ने कहा, "उनका पांच साल का पहला कार्यकाल शानदार रहा। वह अभी यंग हैं और अगले पांच साल में बहुत कुछ कर सकते हैं।"
58 साल के चंद्रा ने टाटा संस की कमान ऐसे वक्त अपने हाथ में ली थी, जब यह समूह मुश्किल दौर से गुजर रहा था। सायरस मिस्त्री ने समूह पर कॉर्पोरेट गवर्नेंस के उल्लंघन का आरोप लगाया था। समूह की कई कंपनियां चैलेंज का सामना कर रही थीं। सवाल है कि चंद्रा ने इन मुश्किलों का कैसे समाधान किया? इसके जवाब में गोयनका ने कहा, "चंद्रा का पहला काम पिछले कुछ साल में निगेटिव खबरों के बाद समूह की इमेज फिर से स्थापित करना था। इस काम को उन्होंने बखूबी अंजाम दिया। उन्होंने समूह की कंपनियों की ग्रोथ बढ़ाई।"
गोयनका ने कहा, "चंद्रा ने बहुत जल्द टाटा टेलीसर्विसेज की मुश्किलों का निपटारा कर दिया। एयर इंडिया को वापस टाटा समूह का हिस्सा बनाने के रतन टाटा के सपने को पूरा किया।" चंद्रा के पहले कार्यकाल में टाटा ग्रुप का मार्केट कैपिटलाइजेशन 170 फीसदी से ज्यादा बढ़ा है। ग्रुप की कई कंपनियों की मार्केट वैल्यू दोगुनी हो गई है।
उन्होंने कहा कि भूषण स्टील का अधिग्रहण और रिटेल एवं डिजिटल स्पेस में नए वेंचर्स में इनवेस्टमेंट से इनवेस्टर्स को यह जाहिर हो गया कि यह समूह सही दिशा में जा रहा है। एयर इंडिया के अधिग्रहण से समूह ने अपने साहस का परिचय दिया है। अब टाटा समूह की कई कंपनियां तेज ग्रोथ के रास्ते पर हैं।