लॉजिस्टिक्स फर्म ईकॉम एक्सप्रेस (Ecom Express Limited) अब अपनी ही कॉम्पिटीटर डेल्हीवरी (Delhivery) के पास जाने वाली है। इसे इसकी पीक वैल्यूएशन से 80 प्रतिशत के डिस्काउंट पर बेचा जा रहा है। डेल्हीवरी, ईकॉम एक्सप्रेस को 1,407 करोड़ रुपये में खरीद रही है। डेफिनिटिव एग्रीमेंट साइन हो गया है। सौदे के तहत ईकॉम एक्सप्रेस में 99.4 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी जाएगी। खरीद के पूरा होने के बाद ईकॉम, डेल्हीवरी की सहायक कंपनी बन जाएगी। बता दें कि ईकॉम एक्सप्रेस ने जब IPO के लिए ड्राफ्ट फाइल किया था तो वह डेल्हीवरी ही थी, जिसने आरोप लगाया था कि पेपर्स में गलत फिगर्स दी गई हैं। अब यही इसे खरीद रही है।
डेल्हीवरी के सीईओ साहिल बरुआ ने फरवरी में एनालिस्ट्स से कहा था कि वे दूसरी कंपनियों के अधिग्रहण के लिए तैयार हैं। अगर कंसोलिडेशन का सही मौका सही कीमत पर उपलब्ध होता है तो ऐसा किया जाएगा। किसे पता था कि ईकॉम एक्सप्रेस की खराब चल रही किस्मत के चलते वह डेल्हीवरी के लिए सही मौका साबित होगी।
ईकॉम एक्सप्रेस की शुरुआत संजीव सक्सेना, मंजू धवन, के सत्यनारायण और टी ए कृष्णन ने साल 2012 में की थी। ई-कॉमर्स बूम की सवारी करते हुए कंपनी कामयाब हुई। बड़े-बड़े निवेशकों का साथ भी मिला। लेकिन फिर ऐसी नौबत कैसे आ गई कि ईकॉम एक्सप्रेस पर 'फॉर सेल' का टैग लग गया। इसकी वजह रही एक के बाद एक लगे झटके। कंपनी ऑपरेशंस से जुड़ी चुनौतियों से जूझ रही है। इसकी लिस्टिंग की कोशिशें भी नाकाम रहीं। इतना ही नहीं कंपनी पर वित्तीय जानकारी को गलत तरीके से पेश करने के आरोप भी लगे। एक फाउंडर की मौत भी हुई और कंपनी के सबसे बड़े क्लाइंट से भी झटका मिला।
कितना बड़ा IPO लाने का था प्लान
पिछले साल सेबी से मंजूरी मिलने के बाद, ईकॉम एक्सप्रेस अपने आईपीओ की ओर बढ़ रही थी। इश्यू से 31 करोड़ डॉलर (2,600 करोड़ रुपये) तक जुटाए जाने की उम्मीद थी। लेकिन फिर कंपनी ने इस साल की शुरुआत में अपनी आईपीओ योजनाओं को टाल दिया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लागत में कटौती के लिए इसने 500 कर्मचारियों को नौकरी से भी निकाल दिया। इससे पहले भी कंपनी ने 2022 में आईपीओ का प्लान किया था लेकिन फिर अस्थिर बाजार स्थितियों के कारण योजनाएं ठप हो गईं। ईकॉम एक्सप्रेस ने दूसरी बार अपने आईपीओ को वापस लेने का फैसला तब लिया, जब सितंबर 2024 में डेल्हीवरी ने आरोप लगाया कि फर्म ने अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में दोनों कंपनियों के शिपमेंट वॉल्यूम, प्रॉफिटेबिलिटी और कैपेसिटी मेट्रिक्स के संबंध में गलत आंकड़े पेश किए हैं।
Ecom Express के लिए ई-कॉमर्स कंपनी मीशो एक बड़ी क्लाइंट रही। कंपनी के कुल कारोबार का 50 प्रतिशत मीशो से आता था। पिछले साल फरवरी में मीशो ने अपना खुद का इन-हाउस लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म वैल्मो लॉन्च किया। इससे अन्य लॉजिस्टिक्स कंपनियों के साथ-साथ Ecom Express को भी भारी नुकसान हुआ। अब मीशो के 50 प्रतिशत से ज्यादा ऑर्डर वाल्मो के जरिए पहुंच रहे हैं।
Ecom Express के को-फाउंडर्स में से एक टी ए कृष्णन की अक्टूबर 2023 में अचानक मौत भी कंपनी के लिए एक झटका साबित हुई। हो सकता है कि इसका असर कंपनी के ऑपरेशंस पर पड़ा हो। कृष्णन ने कंपनी का डायरेक्टर बनने से पहले चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर और सीईओ के रूप में कार्य किया। लेकिन वह एक लंबी बीमारी से भी जूझ रहे थे। सूत्रों का कहना है कि कृष्णन के निधन के साथ कंपनी के कई पूर्व शीर्ष कर्मचारियों ने भी इस्तीफा दे दिया, जिससे कंपनी में और अस्थिरता पैदा हो गई।
ईकॉम एक्सप्रेस पिछले कुछ सालों से धीमी ग्रोथ दर्ज कर रही है। इसका फोकस आईपीओ लाने से पहले घाटे को कंट्रोल करने पर था। वित्त वर्ष 2023 में कंपनी का रेवेन्यू 22 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2,548 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। कंपनी का 31 मार्च 2024 तक टर्नओवर 2607.30 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2025 में रेवेन्यू घटकर 2,609 करोड़ रुपये रह गया। वित्त वर्ष 2024 में ईकॉम एक्सप्रेस का घाटा 67 प्रतिशत घटकर 256 करोड़ रुपये रह गया।
कंपनी मुनाफे के मोर्चे पर पीछे ही रही। जैसे-जैसे प्रतिस्पर्धा बढ़ती गई, फंडिंग खत्म होती गई और कंपनी को अपनी ग्रोथ को बरकरार रखने में संघर्ष करना पड़ा। मार्केट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ट्रैक्सन के आंकड़ों के अनुसार, ईकॉम एक्सप्रेस वारबर्ग पिंकस, पार्टनर्स ग्रुप और ब्रिटिश इंटरनेशनल इनवेस्टमेंट जैसे बड़े निवेशकों से अब तक 12 राउंड की सीरीज में 32.4 करोड़ डॉलर तक की फंडिंग जुटा चुकी है। कंपनी ने 85 करोड़ डॉलर की पीक वैल्यूएशन हासिल की है।