पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई मामले देखने को मिले हैं, जिनमें न्याय के लिए एंप्लॉयीज ने कंपनियों को कोर्ट में घसीटा है। पिछले साल आईटी कंपनी Infosys को सेंट्रल लेबर कमीशन का नोटिस मिला था। बाद में कर्नाटक लेबर डिपार्टमेंट ने भी कंपनी को तलब किया था। यह मामला एंप्लॉयमेंट एग्रीमेंट्स में नॉन-कंपीट क्लॉज से जुड़ा था। चेन्नई ने TSC को उसके एक एंप्लॉयी को नौकरी पर वापस रखने का आदेश दिया था, जिसे कंपनी ने 2015 में हटा दिया था। कोर्ट ने टीसीएस को पूरे सात की सैलरी और दूसरे फायदे भी देने को कहा था। ये ऐसे कुछ उदाहरण हैं, जो बताते हैं कि एंप्लॉयी की मदद के लिए कई कानून पहले से मौजूद हैं। कंपनियां मनमानी तरीके से उन्हें नौकरी से नहीं हटा सकती या डरा नहीं सकतीं। मनीकंट्रोल ने कुछ एक्सपर्ट्स से यह जानने की कोशिश की कि एंप्लॉयीज को किन प्रमुख कानूनों की जानकारी जरूर रखनी चाहिए।
