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अमेरिका के साथ ट्रेड डील अधर में, हाई टैरिफ का असर कम करने के लिए भारत की नजर नए बाजारों पर

अमेरिका के कड़े टैरिफ ने भारत की अन्य बाजारों में एंट्री करने या विस्तार करने की इच्छा को बढ़ाया है। भारत ने पिछले साल 4 ट्रेड समझौते किए या उन्हें लागू किया। अमेरिका का रुख देखते हुए अब भारत के लिए अपने निर्यात गंतव्यों का विस्तार करना अनिवार्य हो गया है

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Jan 11, 2026 पर 12:30 PM
अमेरिका के साथ ट्रेड डील अधर में, हाई टैरिफ का असर कम करने के लिए भारत की नजर नए बाजारों पर
अमेरिकी टैरिफ के दबाव ने भारत को अमेरिका से परे दूसरे देशों के बाजारों में तेजी से पांव फैलाने की ओर धकेल दिया है।

भारत अपने निर्यातकों के लिए बाजार खोलने और अमेरिका के ऊंचे टैरिफ के असर को कम करने के लिए तेजी से दूसरे देशों के साथ ट्रेड डील कर रहा है। भारत की अमेरिका के साथ व्यापार समझौता करने की कोशिशें अभी तक कामयाब नहीं हो पाई हैं। अगस्त 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के लिए टैरिफ बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया था। यह एक ऐसा झटका है, जिससे नौकरियों के जाने का खतरा है। साथ ही भारत की मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट पावरहाउस बनने की महत्वाकांक्षा को भी नुकसान पहुंचा है।

एएफपी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि विशेषज्ञों का कहना है कि इस दबाव ने भारत को अमेरिका से परे दूसरे देशों के बाजारों में तेजी से पांव फैलाने की ओर धकेल दिया है। भारत ने पिछले साल 4 ट्रेड समझौते किए या उन्हें लागू किया। इनमें ब्रिटेन के साथ एक बड़ा समझौता भी शामिल रहा।

अब देश नई डील्स पर नजर गड़ाए हुए है। यूरोपीय संघ, यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन, मेक्सिको, चिली और दक्षिण अमेरिकी मर्कोसुर ट्रेड ब्लॉक के साथ या तो नए सौदों के लिए या मौजूदा समझौतों का विस्तार करने के लिए बातचीत चल रही है। एएफपी के मुताबिक, ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (GTRI) के अजय श्रीवास्तव का कहना है कि अगर यह बातचीत सफल होती है तो भारत के लगभग हर बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ व्यापारिक समझौते होंगे।

निर्यात गंतव्यों का विस्तार करना अब जरूरी

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