भारत US, EU से आने वाले स्मार्टफोन पर टैरिफ में रियायत देने को तैयार, कैसे फायदेमंद हो सकता है यह दांव

मार्च में इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने वाणिज्य मंत्रालय से स्मार्टफोन, टेलीकॉम इक्विपमेंट्स, वियरेबल्स और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए अमेरिका से आयात पर टैरिफ को खत्म करने की अपील की थी

अपडेटेड May 22, 2025 पर 7:46 PM
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अभी अमेरिका से भारत आने वाले स्मार्टफोंस पर 16.5 प्रतिशत की बेसिक कस्टम ड्यूटी के साथ-साथ सरचार्ज भी लगता है।

भारत, अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) जैसे नॉन-प्रोड्यूसर देशों से आने वाले स्मार्टफोन पर उनके साथ प्रस्तावित व्यापार सौदों (Trade Deals) के जरिए टैरिफ में रियायत देने के लिए तैयार है। भारत यूरोपीय संघ या अमेरिका से शायद ही कभी स्मार्टफोन आयात करता है। ऐसे में भारत में EU और अमेरिका से आने वाले स्मार्टफोन पर टैरिफ कम करने या खत्म करने से जोखिम न के बराबर है। अभी अमेरिका से भारत आने वाले स्मार्टफोंस पर 16.5 प्रतिशत की बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) के साथ-साथ सरचार्ज भी लगता है। EU से आने वाले स्मार्टफोंस पर 20 प्रतिशत तक की ड्यूटी लगती है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी का कहना है, "हम वियतनाम से आने वाले स्मार्टफोन के लिए टैरिफ में रियायत नहीं देंगे क्योंकि वह एक प्रोड्यूसर कंट्री है, लेकिन हम अमेरिका या यूरोप के लिए ऐसा कर सकते हैं, क्योंकि वे भारत के उत्पादन को प्रभावित नहीं कर सकते, वे इस प्रोडक्ट को नहीं बनाते हैं।"

भारतीयों के लिए लागत कम करने में मिलेगी मदद


अधिकारी ने आगे कहा, "अगर हम नॉन-प्रोड्यूसर देशों को FTA (मुक्त व्यापार समझौते) के जरिए टैरिफ में रियायतें देते हैं, तो इससे भारतीय उपभोक्ताओं के लिए लागत कम करने में मदद मिलेगी।" मार्च में इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ICEA) ने वाणिज्य मंत्रालय से स्मार्टफोन, टेलीकॉम इक्विपमेंट्स, वियरेबल्स और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए अमेरिका से आयात पर टैरिफ को खत्म करने की अपील की थी। अमेरिका इन कैटेगरीज में मैन्युफैक्चरिंग में भारत का डायरेक्ट कॉम्पिटीटर नहीं है। ICEA ने कहा था कि जीरो टैरिफ स्थानीय उद्योग को स्मार्टफोन एक्सपोर्ट में 50 अरब डॉलर और अमेरिका को कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 80 अरब डॉलर के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा।

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भारत के लिए और कैसे फायदेमंद हो सकता है यह फैसला

अमेरिकी स्मार्टफोन के भारत में आयात पर टैरिफ में रियायत इस क्षेत्र को भविष्य में अमेरिकी प्रशासन की अप्रत्याशित व्यापार नीतियों से बचाने में मदद करेंगी। वहीं यूरोपीय संघ के साथ, यह WTO (World Trade Organization) में लंबे समय से लंबित विवाद को सुलझाने में मदद करेगी।

EU ने मोबाइल फोन सहित इनफॉरमेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (ICT) सामान पर भारत की भारी भरकम कस्टम ड्यूटी के खिलाफ 2019 में विवाद निपटान मामला शुरू किया था। EU ने भारत की ओर से तगड़ी कस्टम ड्यूटी को WTO मानदंडों का उल्लंघन बताया था। अप्रैल 2023 में आए फैसले ने यूरोप के दावे को बरकरार रखा। इसके बाद भारत ने द्विपक्षीय बातचीत के जरिए मसले को सुलझाने का फैसला किया।

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