'₹1 लाख का लैपटॉप ₹40,000 में बिकेगा', वेदांता चेयरमैन बोले- भारत में सेमीकंडक्टर बनने से घटेंगे कई प्रोडक्ट के दाम

वेदांता (Vedanta), ताइवान की दिग्गज इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी फॉक्सकॉन (Foxconn) के साथ मिलकर गुजरात में 1.54 लाख करोड़ रुपये की लागत से नया सेमीकंडक्टर प्लांट लगा रही है

अपडेटेड Sep 15, 2022 पर 10:35 AM
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अनिल अग्रवाल, वेदांता ग्रुप के चेयरमैन
     
     
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    वेदांता (Vedanta), ताइवान की दिग्गज इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी फॉक्सकॉन (Foxconn) के साथ मिलकर गुजरात में 1.54 लाख करोड़ रुपये की लागत से नया सेमीकंडक्टर प्लांट लगा रही है। वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने इस बारे में हमारे सहयोगी चैनल CNBC-TV18 से बात करते हुए कहा कि सेमीकंडक्टर चिप्स के भारत में बनने से कई उत्पादों की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

    उन्होंने चैनल को बताया, "आज, एक अच्छे लैपटॉप की कीमत करीब 1 लाख रुपये है, और एक बार ग्लास व सेमीकंडक्टर चिप (भारत में) उपलब्ध हो जाने के बाद, इसकी कीमत 40,000 रुपये या उससे भी कम हो सकती है।" अग्रवाल ने कहा, "ग्लास का उत्पादन फिलहाल ताइवान और कोरिया में होता है, लेकिन जल्द ही इसका उत्पादन भारत में भी किया जाएगा।"

    वेदांता चेयरमैन ने आगे कहा कि देश की आंत्रप्रेन्योरिशप क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए वेदांता, महाराष्ट्र में भी मैन्युफैक्चरिंग हब को आगे बढ़ाएगी, जहां मोबाइल फोन, लैपटॉप और यहां तक कि इलेक्ट्रिक वाहन (EV) जैसे उत्पादों को लक्ष्य में रखा जाएगा।


    वेदांता और फॉक्सकॉन के ज्वाइंट वेंचर (JV) के लिए फंडिंग के स्रोत पर बोलते हुए उन्होंने कहा, "ऐसा कोई भी संस्थान नहीं है जो हमें फंड नहीं देना चाहता है। फॉक्सकॉन के पास 38 प्रतिशत इक्विटी होगी और इस तरह वह पैसा लाएगी। इस प्रोजेक्ट के लिए पैसा कभी बाधा नहीं बनेगा।"

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    बता दें कि वेदांता ने एक दिन पहले 13 सितंबर को फॉक्सकॉन के साथ मिलकर गुजरात सरकार के साथ करार किया। करार के तहत वेदांता-फॉक्सकॉन राज्य में 1.54 लाख करोड़ रुपये के निवेश से चिप और डिस्प्ले एफएबी का प्लांट लगाएंगी। यह वेदांता के सबसे बड़े निवेश में शुमार है। सेमीकंडक्टर मार्केट तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले चार वर्षों यानी वर्ष 2026 तक यह 6300 करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है। वर्ष 2020 में यह महज 1500 करोड़ डॉलर का था।

    सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल ऑटो और स्मार्टफोन इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर होता है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक सामानों में भी इसका इस्तेमाल होता है। अभी दुनिया के अधिकतर देश चिप की सप्लाई के लिए ताइवान समेत अन्य देशों पर निर्भर हैं लेकिन जल्द ही भारत भी इसमें शामिल हो सकता है।

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