India-UK FTA: भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल समेत इन चीजों पर ​जीरो इंपोर्ट डयूटी, भारत में क्या होगा सस्ता

भारत को उम्मीद है कि मुक्त व्यापार समझौते की बदौलत यह व्यापार 2030 में बढ़कर दोगुना हो जाएगा। भारत वर्तमान में यूके को अपैरल और टेक्सटाइल का चौथा सबसे बड़ा सप्लायर है। पहले नंबर पर चीन है। उसके बाद बांग्लादेश और तुर्की हैं

अपडेटेड Jul 24, 2025 पर 10:17 PM
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इस समझौते के तहत 99 प्रतिशत प्रोडक्ट कैटेगरीज के पूरी तरह ड्यूटी-फ्री होने से भारत को फायदा होगा।

भारत और ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) हो गया है। 24 जुलाई को दोनों देशों की ओर से इसे साइन किया गया। इस समझौते से दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा मिलने, भारत से ब्रिटेन को होने वाले एक्सपोर्ट में से 99 प्रतिशत पर टैरिफ या इंपोर्ट ड्यूटी खत्म होने, हजारों रोजगार क्रिएट होने और ब्रिटिश व्हिस्की, कार और कई अन्य चीजों पर भारत में टैरिफ घटाने का रास्ता साफ होगा। भारत का ब्रिटेन के साथ द्विपक्षीय व्यापार अभी 56 अरब डॉलर है। भारत को उम्मीद है कि मुक्त व्यापार समझौते की बदौलत यह व्यापार 2030 में बढ़कर दोगुना हो जाएगा।

अधिकारियों ने कहा कि इस समझौते के तहत 99 प्रतिशत प्रोडक्ट कैटेगरीज के पूरी तरह ड्यूटी-फ्री होने से भारत को फायदा होगा। भारत और यूनाइटेड किंगडम ने के बीच हुए एफटीए के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल्स, केमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स, खिलौने और जेम्स एंड ज्वैलरी जैसी भारत से एक्सपोर्ट होने वाली चीजों पर टैरिफ जीरो रहेगा।

भारत सरकार ने कहा है कि वर्कफोर्स की ज्यादा जरूरत वाले सेक्टर्स में से मरीन प्रोडक्ट्स के मामले में भारतीय निर्यात पर टैरिफ 20 प्रतिशत से घटाकर जीरो कर दिया गया है। इसी तरह टेक्सटाइल और अपैरल पर 12 प्रतिशत से घटाकर जीरो, केमिकल्स पर 8 प्रतिशत से घटाकर जीरो और बेसलाइन मेटल्स के मामले में 10 प्रतिशत से घटाकर जीरो कर दिया गया है।


भारत, यूके के लिए अपैरल और टेक्सटाइल का चौथा सबसे बड़ा सप्लायर

भारत वर्तमान में यूके को अपैरल और टेक्सटाइल का चौथा सबसे बड़ा सप्लायर है। पहले नंबर पर चीन है। उसके बाद बांग्लादेश और तुर्की हैं। ब्रिटेन, भारत से जितना इंपोर्ट करता है, उसमें अपैरल और टेक्सटाइल की 6.6 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कनफेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI) ने कहा कि ब्रिटेन की ओर से इंपोर्ट ड्यूटी हटने से भारतीय निर्यातकों को बांग्लादेश और तुर्की जैसे देशों के साथ समान स्तर पर कंपीट करने में मदद मिलेगी। अपैरल और टेक्सटाइल पर जीरो ड्यूटी से पानीपत, भदोही, आगरा, कांचीपुरम, भागलपुर, वाराणसी और जयपुर जैसे क्षेत्रों के पारंपरिक बुनाई और कारीगर समूहों को फायदा होगा।

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भारतीय चाय, इंस्टैंट कॉफी और मसालों पर भी इंपोर्ट ड्यूटी हटी

ब्रिटेन चमड़े पर भी 16 प्रतिशत तक टैरिफ घटाएगा, जिससे भारत को एक से दो वर्षों में इस क्षेत्र में 5 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी हासिल करने में मदद मिलेगी। इससे चमड़े और जूते के निर्यात में 90 करोड़ डॉलर से अधिक की बढ़ोतरी होगी। ब्रिटेन ने भारतीय चाय, इंस्टैंट कॉफी और मसालों पर भी टैरिफ हटा दिया है। भारत के इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स के लिए भी जीरो टैरिफ कर दिया है, जिससे स्मार्टफोन, ऑप्टिकल फाइबर केबल और इनवर्टर का निर्यात बढ़ने की उम्मीद है।

फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में, 99.7 प्रतिशत चीजों पर टैरिफ 70 प्रतिशत से घटाकर जीरो कर दिया गया है। ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौते से ताजे अंगूर, बेकरी प्रोडक्ट्स, मेवे और सॉस जैसे भारत के कृषि और खाद्य निर्यात में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

15 प्रतिशत बढ़ सकता है खिलौनों का निर्यात

भारत के मेडिकल टेक्नोलॉजी सेक्टर को भी फायदा हो सकता है क्योंकि एक्स-रे और ईसीजी मशीनों जैसी मेडिकल डिवाइस अब ड्यूटी फ्री हो जाएंगी। एफटीए से केमिकल सेक्टर यूके को निर्यात में 30 से 40 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद कर रहा है। सरकार ने कहा कि ड्यूटी जीरो होने से खिलौनों के निर्यात में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है।

जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर की बात करें तो वर्तमान में भारत, ब्रिटेन को 94.1 करोड़ डॉलर के जेम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट करता है। इसमें अकेले ज्वैलरी का योगदान 40 करोड़ डॉलर है। एफटीए के तहत टैरिफ खत्म होने से उद्योग को उम्मीद है कि अगले दो से तीन वर्षों में यह निर्यात दोगुना हो जाएगा।

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भारत में कौन सी ब्रिटिश चीजें होंगी सस्ती

ब्रिटेन के व्यापार और व्यवसाय विभाग (DBT) ने कहा कि समझौता लागू होने के बाद औसत सीमा शुल्क 15 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत रह जाएगा। इससे भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सॉफ्ट ड्रिंक, ब्यूटी प्रोडक्ट्स, कार और मेडिकल इक्विपमेंट जैसे ब्रिटिश प्रोडक्ट्स सस्ते हो जाएंगे। ब्रिटेन के व्हिस्की प्रोड्यूसर्स को इंपोर्ट ड्यूटी 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत किए जाने से फायदा होगा। अगले 10 वर्षों में इसे और भी घटाकर 40 प्रतिशत पर लाया जाएगा।

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