इंडिया की सबसे बड़ी एयरलाइंस कंपनी (Indigo) ने इस महीने की शुरुआत में बेस फेयर में फ्यूल चार्ज को शामिल कर यात्रियों को चौंका दिया। इससे कई लोगों को लगा कि दूसरी कंपनियां भी अपने टिकट में इस तरह के चार्ज को शामिल कर सकती हैं। हालांकि, अब तक ऐसा नहीं हुआ है। फेस्टिव सीजन को देखते हुए एयरलाइंस कंपनियां टिकट में नए चार्ज शामिल करने की जगह बेस फेयर बढ़ा रही हैं। मिनिस्ट्री ऑफ एविएशन से मिले डेली पैसेंजर के लोड फैक्टर्स को देखने से पता चलता है कि IndiGo ने अपना यूजर बेस बरकरार रखा है। टिकट में फ्यूल चार्ज शामिल करने का ज्यादा असर उसके टिकट की बिक्री पर नहीं पड़ा है। पैसेंजर्स के नजरिए से जब टिकट की कीमतें प्रतिस्पर्धी हैं तब तक फेयर में लाइन आइटम्स ज्यादा मायने नहीं रखता है। फेस्टिवल सीजन नजदीक आने के साथ सभी रूट के टिकटों के दाम में इजाफा देखने को मिला है। लेकिन, यह वृद्धि फ्यूल चार्ज रेट्स के मुताबिक नहीं रही है।
इंडिगो की सीटों का कैलकुलेशन
फ्यूल चार्जेज डिस्टेंस पर निर्भर करता है। इसके लिए प्रति पैसेंजर 300 से 1,000 रुपये की रेंज है। इस आर्टिकल के लिए इंटेलिजेंस एंड एनालिटिक्स फर्म OAG Aviation ने मनीकंट्रोल के साथ एक्सक्लूसिव डेटा शेयर किए हैं। इससे पता चलता है कि IndiGo हर हफ्ते 13,535 फ्लाइट्स ऑपरेट करती है, जिसमें 24,01,374 सीटे होती हैं। फ्रीक्वेंसी और सीट के लिहाज से सबसे ज्यादा डिप्लॉयमेंट 501-1,000 किलोमीटर रूट्स पर है। इनमें 4,168 वीकली फलाइट्स में 7,42,456 सीटें होती हैं। सबसे लंबा रूट 3,501 किलोमीटर से ज्यादा का होता है। इस पर एयरलाइंस ने 1,000 रुपये का फ्यूल चार्ज लगाया है। इसमें कम फ्लाइट और सीट हैं। इसके 13,535 वीकली फ्रीक्वेंसीज में सिर्फ 180 ऐसी रूट्स की है जो 3,501 किलोमीटर या इससे ज्यादा लंबी हैं। इनमें हर हफ्ते 40,150 सीट्स होती हैं। इसमें दो B777 एयरक्राफ्ट का भी इस्तेमाल होता है।
आरसीएस-उड़ान सेगमेंट पर फ्यूल चार्ज नहीं
इंडिगो ने सितंबर में घरेलू फ्लाइट्स में 84.7 फीसदी का लोड फैक्टर हासिल किया। इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर भी इसका लोड फैक्टर घरेलू फ्लाइट्स के जितना है। इसके बुकिंग इंजन को देखने से पता चलता है कि एयरलाइंस ने RCS-UDAN या सस्ते फ्लाइट सेगमेंट में फ्यूल चार्ज नहीं लगाया है। RCS-UDAN के तहत इस एयरलाइंस की व्यापक मौजूदगी है। लेकिन कुल नेटवर्क में RCS-UDAN रूट की हिस्सेदारी नाममात्र की है।
दिसंबर तक इनकम ग्रोथ अच्छी रहने की उम्मीद
पिछले दो महीनों में एयरलाइंस ने हर हफ्ते औसतन 20,00,000 पैसेंजर्स को यात्रा करने की सुविधा दी है। फ्यूल चार्ज बैंड्स के लिहाज से इसका बराबर डिस्ट्रिब्यूशन करने पर इससे एयरलाइन को हर हफ्ते 95 करोड़ रुपये से 98 करोड़ रुपये की कमाई होती है। इसमें बदलाव होता रहता है, क्योंकि सबी बैंड्स में एवरेज लोड फैक्टर एक समान नहीं होता है। हम जैसे जैसे दशहरा और दिवाली के हॉलीडे सीजन की तरफ बढ़ते हैं इनकम यहां से बढ़ने लगेगी। कम से कम दिसंबर तक यही स्थिति रहेगी।