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Reliance Jio: भारत के बाद श्रीलंका में छाने की तैयारी, सरकारी टेलिकॉम कंपनी में खरीदना चाहती है हिस्सेदारी

तीनों कंपनियों के प्रस्तावों का मूल्यांकन मंत्रिमंडल द्वारा अप्रूव्ड 'सरकारी उद्यमों के विनिवेश पर विशेष दिशानिर्देशों' के अनुसार किया जाएगा। हिस्सेदारी बिक्री के लिए श्रीलंका ने 10 नवंबर से संभावित निवेशकों से प्रस्ताव आमंत्रित किए थे। श्रीलंकाई सरकार पूंजी जुटाने और दक्षता बढ़ाने के लिए अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों का निजीकरण करना चाह रही है

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Jan 14, 2024 पर 8:20 AM
Reliance Jio: भारत के बाद श्रीलंका में छाने की तैयारी, सरकारी टेलिकॉम कंपनी में खरीदना चाहती है हिस्सेदारी
श्रीलंका टेलीकॉम पीएलसी 'SLT-MOBITEL' के ब्रांड नाम के तहत कारोबार करती है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) की टेलिकॉम आर्म, जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) श्रीलंका की सरकारी टेलिकॉम कंपनी श्रीलंका टेलीकॉम पीएलसी में हिस्सेदारी खरीदना चाहती है। जियो प्लेटफॉर्म्स उन 3 एंटिटीज में से एक है, जिन्होंने श्रीलंका टेलीकॉम पीएलसी में श्रीलंका सरकार की हिस्सेदारी हासिल करने में दिलचस्पी दिखाई है। हिस्सेदारी बिक्री के लिए श्रीलंका ने 10 नवंबर से संभावित निवेशकों से प्रस्ताव आमंत्रित किए थे। 12 जनवरी को प्रस्ताव जमा करने की समय सीमा समाप्त होने के बाद श्रीलंकाई सरकार ने एक बयान जारी किया, जिसमें तीन संभावित बोलीदाताओं के रूप में गॉर्ट्यून इंटरनेशनल इनवेस्टमेंट होल्डिंग लिमिटेड और पेटीगो कॉमर्सियो इंटरनेशनल एलडीए के साथ जियो प्लेटफॉर्म्स का उल्लेख किया गया।

बयान में कहा गया है कि तीनों कंपनियों के प्रस्तावों का मूल्यांकन मंत्रिमंडल द्वारा अप्रूव्ड 'सरकारी उद्यमों के विनिवेश पर विशेष दिशानिर्देशों' के अनुसार किया जाएगा। इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन, श्रीलंका टेलीकॉम पीएलसी में सरकार की हिस्सेदारी की बिक्री के लिए लेनदेन सलाहकार है। श्रीलंका टेलीकॉम पीएलसी 'SLT-MOBITEL' के ब्रांड नाम के तहत कारोबार करती है।

कंपनी में श्रीलंका सरकार की कितनी हिस्सेदारी

वर्तमान में, श्रीलंका के ट्रेजरी सचिव के पास कंपनी में 49.5 प्रतिशत की नियंत्रण हिस्सेदारी है, जबकि एम्स्टर्डम स्थित ग्लोबल टेलीकम्युनिकेशंस होल्डिंग्स के पास 44.9 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। शेष हिस्सेदारी सार्वजनिक शेयरधारकों के पास है। हिस्सेदारी की बिक्री ऐसे समय में हो रही है, जब आर्थिक रूप से तनावग्रस्त श्रीलंकाई सरकार पूंजी जुटाने और दक्षता बढ़ाने के लिए अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों का निजीकरण करना चाह रही है।

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