LIC-GIC कितनी जरूरी, बीमा नियामक इरडा ने किया खुलासा

एलआईसी (LIC), जीआईसी (GIC) और न्यू इंडिया एश्योरेंस का मजबूत बना रहना देश के लिए बहुत जरूरी हैं। बीमा नियामक IRDAI ने शुक्रवार को इन्हें डोमेस्टिक सिस्टमैटिकली इंपोर्टेंट इंश्योरर्स (D-SIIs) में रखा है यानी कि घरेलू स्तर पर सिस्टम के लिए ये बहुत ही महत्वपूर्ण बीमा कंपनियां हैं। जानिए इस सूची में रखने का क्या मतलब है और इससे इन तीनों कंपनियों के लिए क्या बदलता है

अपडेटेड Apr 01, 2023 पर 8:43 AM
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घरेलू सिस्टम के लिए बेहद जरूरी बीमा कंपनियों की सूची में शामिल होने का मतलब है कि इनके फेल होने का रिस्क नहीं उठाया जा सकता है। ऐसे में इस सूची D-SIIs में आने वाली बीमा कंपनियों पर अतिरिक्त निगरानी रखी जाती है।

एलआईसी (LIC), जीआईसी (GIC) और  न्यू इंडिया एश्योरेंस का मजबूत बना रहना देश के लिए बहुत जरूरी हैं। बीमा नियामक IRDAI ने शुक्रवार को इन्हें डोमेस्टिक सिस्टमैटिकली इंपोर्टेंट इंश्योरर्स (D-SIIs) में रखा है यानी कि घरेलू स्तर पर सिस्टम के लिए ये बहुत ही महत्वपूर्ण बीमा कंपनियां हैं। इरडा के मुताबिक लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LICI), जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GICI) और न्यू इंडिया एश्योरेंस कॉरपोरेशन (NIAC) इतने बड़े और महत्वपूर्ण हैं कि इनके फेल होने का रिस्क नहीं उठाया जा सकता है। इरडा ने इन्हें वित्त वर्ष 2021-22 के D-SIIs की लिस्ट में रखा था और पिछले वित्त वर्ष 2022-23 के लिस्ट में भी रखा है।

किस आधार पर रखा जाता है D-SIIs में

D-SIIs में बीमा कंपनियों को उनकी साइज, बाजार में महत्ता और देश-विदेश में कारोबार के आधार पर शामिल किया जाता है जिनके फेल होने पर घरेलू फाइनेंशियल सिस्टम को तगड़ा झटका लगे। ऐसे में इसमें शामिल होने वाली बीमा कंपनियों की सर्विसेज देश की अर्थव्यवस्था के लिए लगातार जारी रहना जरूरी है। हालांकि इरडा का यह भी कहना है कि ये कंपनियां सरकार के भरोसे बैठी रहीं तो यह बहुत बड़ा रिस्क है, इससे मार्केट में अनुशासन कम होगा, कॉम्पटीशन का माहौल खराब होगा और आगे जाकर दिक्कतों की आशंका बढ़ेगी।


फिर इस लिस्ट में आने का क्या है मतलब

घरेलू सिस्टम के लिए बेहद जरूरी बीमा कंपनियों की सूची में शामिल होने का मतलब है कि इनके फेल होने का रिस्क नहीं उठाया जा सकता है। ऐसे में इस सूची D-SIIs में आने वाली बीमा कंपनियों पर अतिरिक्त निगरानी रखी जाती है। ऐसे में इसमें शामिल बीमा कंपनियों को अपने यहां कॉरपोरेट गवर्नेंस बढ़ाने के लिए कोशिशें बढ़ानी हैं। इसके अलावा इन तीनों बीमा कंपनियों एलआईसी, जीआईसी और न्यू इंडिया एश्योरेंस को सभी रिस्क की पहचान करनी है और एक मजबूत रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क और कल्चर तैयार करना है।

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