MF बिजनेस में उतरने की तैयारी में Zerodha, CEO नितिन कामत ने कहा, 'भारतीय बाजार में आ रही ढेर सारी रिटेल और विदेशी पूंजी '

भारत की सबसे बड़ी ब्रोकिंग फर्म जीरोधा के फाउंडर नितिन कामत का मानना है कि भारतीय बाजारों का प्रदर्शन दूसरे देशों के मुकाबले बेहतर रहेगा, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि बाजार की दिशा को लेकर वह कोई अनुमान नहीं लगा सकते हैं

अपडेटेड Sep 02, 2022 पर 9:29 PM
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नितिन कामत, जीरोधा (Zerodha) के को-फाउंडर और सीईओ

नितिन कामत (Nithin Kamath), देश की सबसे बड़ी ब्रोकिंग फर्म जीरोधा (Zerodha) के को-फाउंडर और सीईओ हैं। मनीकंट्रोल के शुभम राज के साथ एक बातचीत में उन्होंने ब्रोकिंग इंडस्ट्री, जीरोधा के सामने आने वाली चुनौतियों, उनके प्रतिद्वंदी कंपनियां कैसे फंडिंग की कमी का सामना करेंगी, उनकी भविष्य की योजनाएं और सेबी जैसी नियामकीय संस्थाओं के साथ अपने अनुभव को लेकर उन्होंने खुलकर बात की। पेश है बातचीत के मुख्य अंश-

सवाल: आपने हाल ही में 1 करोड़ ग्राहकों की संख्या को छू लिया है। इसके लिए आपको बधाई! आपने बताया था कि जो ब्रोकर्स खाता खोलने का कोई शुल्क नहीं लेते हैं, उनके पास निष्क्रिय खातों का ढेर लग सकता है। क्या आप मुझे जीरोधा के निष्क्रिय खातों का अनुपात बता सकते हैं?

जवाब: हमारे पास 70 लाख ग्राहक हैं जिन्होंने पिछले साल कम से कम एक बार ट्रेड किया था। तो हां, हमारे 70 पास प्रतिशत सक्रिय खाते हैं। हमारे पास लगभग 50 लाख से अधिक खाते हैं जहां लोग डीमैट खातों में स्टॉक रखते हैं।

सवाल: अब एक बड़े कस्टमर बेस को हासिल करने और तगड़े कॉम्पिटीशन को देखते हुए, क्या आपको लगता है कि आने वाले समय में ग्रोथ धीमा हो सकता है? अगले 5 साल या निकट अवधि में CAGR से आपकी क्या उम्मीदें है?


जवाब: देखिए बात यह है कि इंडस्ट्री की ग्रोथ पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि बाजार कैसा प्रदर्शन करेगा। अगर आप अनुमान लगा सकते हैं कि निफ्टी क्या करेगा, तो आप अनुमान लगा सकते हैं कि ब्रोकिंग बिजनेस का प्रदर्शन कैसा रहेगा। अब, यह अनुमान लगाना वास्तव में कठिन है कि निफ्टी अगले तीन, चार या 5 सालों में क्या करेगा।

फिर भी अगर यह माना जाए कि निफ्टी अच्छा प्रदर्शन करेगा, तो मुझे लगता है कि नए यूजर्स के मामले में इंडस्ट्री में साल-दर-साल (YoY) आधार पर 20 प्रतिशत की ग्रोथ देखने को मिल सकती है।

सवाल: क्या आप बाजार के ग्रोथ के मुताबिक आगे बढ़ेंगे या इंडस्ट्री से बेहतर प्रदर्शन करेंगे?

जवाब: कॉम्पिटीशन काफी ज्यादा है। हालांकि हम अभी भी मानते हैं कि हमारे पास एक बेहतर प्रोडक्ट है। मैं यही कहूंगा कि हम अपने साथियों से बेहतर प्रदर्शन करना जारी रखेंगे।

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सवाल: क्या आपके पास इंस्टीट्यूशनल ग्राहक भी हैं? अगर नहीं, तो क्या उन्हें जोड़ने की कोई योजना है?

जवाब: नहीं, हमारे पास केवल रिटेल क्लाइंट्स हैं। इंस्टीट्यूशन को निवेश के लिए रिसर्च, लिक्विडिटी और कंपनियों की अहम मैनेजमेंट रिपोर्ट का एक्सेस चाहिए होता है। हमारे पास इसके लिए कौशल नहीं है। साथ ही यह एक बहुत अधिक कॉम्पिटीशन वाला बाजार है और इसमें पैसा नहीं है। कुल मिलाकर बाजार का आकार भी बहुत बड़ा नहीं है। इन्हीं वजहों से हमने उनसे दूर रहने का फैसला किया।

सवाल: भारतीय बाजार में आपने अच्छी पकड़ बना ली है। ऐसे में क्या आप अब दूसरे देशों में भी विस्तार की योजना बना रहे हैं?

जवाब: नहीं, ऐसा नहीं है। साल 2018-19 में मैंने यह रिसर्च करने में कुछ समय खर्च किया था कि क्या हमने जो बनाया है, उसे दूसरे देशों में भी लागू किया जा सकता है। हालांकि रेगुलेशन, बैकएंड तकनीकों आदि के मामले में हर देश अलग है। यह फेसबुक और गूगल की तरह नहीं है, जहां एक ही प्लेटफॉर्म हर देश में बिना किसी बाधा के काम कर सकता है। इसलिए आपको कोई ग्लोबल ब्रोकिंग फर्म जल्द देखने को नहीं मिलती है।

सवाल: अतीत में हमने देखा है कि बाजार नीचे जाने के साथ ट्रेडिंग वॉल्यूम भी कम हो जाता है। आप अगले एक साल में वॉल्यूम में कितनी गिरावट की उम्मीद करते हैं?

जवाब: सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि बाजार कैसे व्यवहार करता है। इसलिए अगर बाजार नीचे जाता है, तो निश्चित रूप से ट्रेडिंग वॉल्यूम नीचे जाएगा और प्लेटफॉर्म पर आने नए यूजर्स की संख्या भी घटेगी।

सवाल: अगर आप पिछले साल अक्टूबर से तुलना करें, जब बाजार अपने उच्चतम स्तर पर था, तब वॉल्यूम में कितनी गिरावट आई है?

जवाब: अगर आप इक्विटी ट्रेडिंग वॉल्यूम को देखें, तो बाजार गिरने के साथ इनमें भी करीब 30 से 40 गिरावट आई थी। पिछले महीने से इसमें तेजी आई है। अभी उतार-चढ़ाव का माहौल है, तो इसमें ट्रेडिंग वॉल्यूम वास्तव में उतना नहीं गिरा। बहुत उठापटक वाले बाजारो में भी, एक्टिव ट्रेडर्स अच्छी संख्या में आते हैं और भाग लेते हैं। यह पूरे देश में ट्रेडर्स का एक छोटा सा उपसमूह है, जिसकी संख्या करीब 10-15 लाख होगी। अधिक ट्रेडिंग वॉल्यूम में इनका ही योगदान होता है।

सवाल: फिनटेक सेगमेंट में, अपस्टॉक्स या ग्रो जैसे कुछ बड़े नामों ने पीई फंडिंग के दम पर अपना कारोबार खड़ा किया है। हालांकि अब फंडिंग की कमी देखी जा रही है। ऐसे में क्या आप इस तरह के बिजनेस मॉडल को संघर्ष करते हुए देखते हैं?

जवाब: दोनों ही फर्म मुनाफे में है। मुझे नहीं लगता है कि पिछले एक-दो सालों में उन्होंने जो फंडिंग जुटाई है या जो मुनाफा कमाया, उसे जला दिया होगा। ऐसे में मुझे नहीं लगता कि कम से कम निकट अवधि में उन्हें कोई संकट होगा। हालांकि अगर बाजार नीचे जाते हैं, और ये माना जाए कि ये कंपनियां अब अधिक मुनाफे में नहीं हैं, तो संभावना है कि उन्हें समस्या हो सकती है। हालांकि यह भी देखना चाहिए इन दोनों कंपनियों और यहां तक ​​कि बाकी फर्म ने भी अपने विज्ञापन खर्च आदि को कम कर दिया है। वे नए ग्राहकों को जोड़ने पर आने वाले खर्च को अब कम कर रही हैं।

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सवाल: जीरोधा के यूजर्स बार-बार ट्रेडिंग के समय तकनीकी खामियों की रिपोर्ट करते हैं। क्या यह किसी तकनीकी खामी के चलते होता है या बहुत ज्यादा वॉल्यूम के वजह से?

जवाब: सबसे हालिया मामला कारोबार खुलने के पहले 5 मिनट में प्राइस टिक को लेकर है। ऑर्डर देने में कोई दिक्कत नहीं है। अगर आप पीरियड में लगातार लॉग आउट करते रहेंगे तो यह टिक नहीं करेगा। लेकिन अगर आप 20-30 सेकेंड तक रुक कर इंतजार करते हैं तो ह टिक करना शुरू कर देगा। ज्यादातर लोग यह करते हैं कि अगर उन्हें प्राइस टिक होता हुआ नहीं दिखता है तो ऐप को अचानक बंद कर देते हैं और फिर से लॉन्च करते हैं।

हमारे ग्राहक सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, वे महानगरों में रह रहे हैं, और वे अंग्रेजी बोलने वाले हैं। हमारे पास ट्विटर यूजर्स काफी ज्यादा हैं, ऐसे में हमें बैंक-आधारित ब्रोकर्स से भी अधिक शिकायतें मिलती हैं, जो सबसे अधिक तकनीकी गड़बड़ियों का सामना वे करते हैं। हम अपने 'अपटाम बनाम एक' कॉम्पिटीशन को लोकल ही नहीं, ग्लोबल स्तर पर ट्रैक करते हैं। मुझे लगता है, पिछले 12 महीनों में, हमारे पास डाउनटाइम कम रहा है।

सवाल: जीरोधा और कौन से नए बिजनेस मॉडल पर काम कर रहा है?

जवाब: कुछ खास नहीं। हमने एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। हम मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। अंतिम मंजूरी अभी बाकी है।

सवाल: आप म्यूचुअल फंड (MF) बिजनेस कब शुरू कर रहे हैं?

जवाब: जब आप AMC लाइसेंस के लिए आवेदन करते हैं, तो SEBI आपको सबसे पहले सैद्धांतिक मंजूरी देता है। एक बार जब वे सैद्धांतिक मंजूरी दे देते हैं, तो आपको बोर्ड का गठन करना होगा, कस्टोडियन को नियुक्त करना होगा, पूरी ऑपरेशनल प्लानिंग तैयार करनी होगी और फिर अंतिम मंजूरी के लिए उनके पास वापस जाना होगा। हमने यह कर लिया है और हम अंतिम मंजूरी के लिए उनके पास गए हैं। अंतिम मंजूरी मिलने के तीन महीने के भीतर, हम म्यूचुअल फंड बिजनेस शुरू कर सकते हैं।

सवाल: बाजार पर एक बार फिर से आते हैं। यूएस फेड की टिप्पणी के बाद बिकवाली का एक और दौर शुरू हो गया है। क्या आपको लगता है कि बाजार में जून के मध्य से आई तेजी खत्म हो सकती है?

जवाब: यह वास्तव में काफी मुश्किल सवाला है। किसी के लिए भी इसका अनुमान लगाना लगभग नामुमकिन सा है। लोगों की भारत में बहुत दिलचस्पी है। इसलिए जब भी बाजार गिरता है, तो यह भारत उतना नहीं गिरता है जितना कि अमेरिका या अन्य देशों में। भारतीय शेयर बाजार में अभी बहुत सी पूंजी आ रही है। सिर्फ रिटेल ही नहीं, बल्कि विदेशी पूंजी भी।

भारत अब दुनिया भर के उन अंतिम कुछ देशों में से एक है जहां पास तेज ग्रोथ है, एक स्थिर सरकार है, और आपके पास लोगों की सही जनसांख्यिकी है। खासतौर से 20-30 साल के युवाओं की एक बड़ी संख्या। तो, ये सभी कारक हैं जो विश्व स्तर पर भारत में बहुत रुचि पैदा करते हैं। इसलिए, हम बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। मैं यह कह सकता हूं कि भारतीय बाजारों का प्रदर्शन दूसरे देशों के मुकाबले बेहतर रहना जारी रहेगा। हालांकि बाजार की दिशा को लेकर कोई अनुमान लगाना वाकई मुश्किल है।

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