LTIMindtree को आईटी सर्विसेज की मांग दिख रही है, लेकिन डील होने में काफी वक्त लग रहा है। कंपनी के सीईओ और एमडी देबाशीष चटर्जी (Debashis Chatterjee) ने मनीकंट्रोल को यह बताया। बातचीत में उन्होंने कंपनी के जून तिमाही के नतीजों पर भी चर्चा की। कंपनी के जून तिमाही के नतीजे कमजोर हैं। रेवेन्यू की तिमाही-दर-तिमाही ग्रोथ सिर्फ 0.1 फीसदी रही। हालांकि, चटर्जी का मानना है कि मौजूदा आर्थिक हालात में यह प्रदर्शन खराब नहीं है। लेकिन, कंपनी के सबसे बड़े वर्टिकल Banking, Financial Services और Insurance (BFSI) में सुस्ती दिख रही है। रिटेल सेक्टर में भी नरमी के संकेत हैं।
पहली तिमाही की डील्स अब दूसरी तिमाही में होंगी
चटर्जी ने कहा कि अगर आप डिसिजन-मेकिंग साइकिल को देखें तो हमें पहली तिमाही में कई डील होने की उम्मीद थी। लेकिन, अब उनके दूसरी तिमाही में होने की उम्मीद है। इसलिए डील के मामले में फैसले लेने में देर हो रही है। ऐसा सभी सेक्टर्स और इंडस्ट्रीज में है। जहां तक फाइनेंशियल सर्विसेज सेगमेंट का सवाल है तो हमें उम्मीद थी कि कुछ क्लाइंट्स हायरिंग पर लगी रोक हटाएंगे और हायरिंग बढ़ाएंगे। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। हमें नहीं पता कि ऐसी स्थिति कब तक बनी रहेगी। हमें उम्मीद है कि आगे किसी समय क्लाइंट्स पर रोक हटाएंगे क्योंकि उन्हें अपने प्लान को पूरा करना है।
एंप्लॉयीज की संख्या में लगातार गिरावट
LTIMindtree के एंप्लॉयीज की संख्या में लगातार तीसरी तिमाही गिरावट देखने को मिली है। तीन तिमाहियों में नेट बेसिस पर इसके एंप्लॉयीज की संख्या में 4,000 से ज्यादा कमी आई है। चटर्जी ने कहा कि कंपनी चाहती थी कि दो कंपनियों के इंटिग्रेशन के दौरान एंप्लॉयीज की नौकरी नहीं जाए। इसके लिए एंप्लॉयीज की स्किल बढ़ाना और उन्हें सही जगह प्लेस करना जरूरी थी। नई हायरिंग से पहले हम यह काम करना चाहते थे। हमने यूटिलाइजेशन बढ़ाया है। हम हायरिंग करने और बेंच बनाने में दिलचस्पी नहीं रखते।
चौथी तिमाही में EBIT मार्जिन बढ़ने की उम्मीद
कंपनी के बॉस ने कहा कि पिछली दो तिमाहियों में (FY23 की तीसरी और चौथी तिमाही) हम इंटिग्रेशन को पूरा करने में काफी व्यस्त रहे। जून तिमाही में हमने हर चीज एक सिस्टम और एक प्रोसेस के तहत लाने की कोशिश की। हमने दोनों कंपनियों के पूरे बेंचक के लिए एक जैसा नजरियां अपनाया। इससे हमने तय किया कि पहले हम वर्कफोर्स का सही इस्तेमाल करेंगे। उसके बाद हम हायरिंग के बारे में सोचेंगे। हालांकि, विलय के दौरान ऑपरेटिंग मार्जिन पर असर पड़ा। इसमें मार्च तिमाही में सुधार दिखना शुरू हुआ था। तिमाही दर तिमाही पर मार्जिन 16.4 फीसदी से बढ़कर 16.7 फीसदी हो गया। चटर्जी को उम्मीद है कि FY24 की आखिरी तिमाही EBIT मार्जिन बढ़ेगा। यह 17-18 फीसदी की रेंज में रहेगा।