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वेदांता के डीमर्जर में इस शख्स की रही है अहम भूमिका, जानें कौन हैं अनिल अग्रवाल

अग्रवाल की गिनती भारत के सबसे अमीर लोगों में होती है। हालांकि , उनकी पृष्ठभूमि काफी सामान्य थी। अपनी दृढ़ता और लगन की बदौलत उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। पटना के रहने वाले अग्रवाल अपने शुरुआती दौर में अंग्रेजी के सिर्फ दो शब्द बोल पाते थे- 'यस' और 'नो'। उन्होंने अपने कारोबारी सफर की शुरुआत स्क्रैप डीलर के तौर पर की थी

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 29, 2023 पर 9:10 PM
वेदांता के डीमर्जर में इस शख्स की रही है अहम भूमिका, जानें कौन हैं अनिल अग्रवाल
वेदांता ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन अनिल अग्रवाल का जन्म बिहार के एक मारवाड़ी परिवार में 1954 में हुआ था।

वेदांता ने अपने बिजनेस के डीमर्जर का ऐलान किया है। इसके तहत 6 कंपनियां बनाई जाएंगी, जिनमें वेदांता लिमिडेट, वेदांता स्टील एंड फेरस मटीरियल्स और वेदांता बेस मेटल्स आदि शामिल हैं। इस डीमर्जर में कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल की अहम भूमिका है। उनका कहना था, 'हमारा मानना है कि अपनी बिजनेस यूनिट को डीमर्ज करके हम हर वर्टिकल में तेज ग्रोथ की बेहतर संभावनाओं के लिए गुंजाइश बना पाएंगे।'

अग्रवाल की गिनती भारत के सबसे अमीर लोगों में होती है। हालांकि , उनकी पृष्ठभूमि काफी सामान्य थी। अपनी दृढ़ता और लगन की बदौलत उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। पटना के रहने वाले अग्रवाल अपने शुरुआती दौर में अंग्रेजी के सिर्फ दो शब्द बोल पाते थे- 'यस' और 'नो'। उन्होंने अपने कारोबारी सफर की शुरुआत स्क्रैप डीलर के तौर पर की थी।

वेदांता ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन अनिल अग्रवाल का जन्म बिहार के एक मारवाड़ी परिवार में 1954 में हुआ था। कॉलेज जाने के बजाय वह काफी उम्र में अपने पिता के साथ कारोबार करने लगे। उनके पिता का एल्युमीनियम कंडक्टर का छोटा सा बिजनेस था। 19 साल की उम्र में वह सपनों की नगरी मुंबई पहुंच गए, जहां उन्होंने केबल कंपनियों से स्क्रैप मेटल खरीदकर इसे बेचना शुरू किया। इस बिजनेस में उन्हें अच्छा मुनाफा हासिल हुआ और 1976 में उन्होंने पहली कंपनी खरीदी। इसमें उन्होंने अपनी सारी जमा पूंजी लगा दी और दोस्तों और परिवारों से भी मदद ली।

उन्होंने कॉपर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी शमशेर स्टर्लिंग कॉरपोरेशन को खरीदा था, जो उस वक्त दिवालिया होने के कगार पर खड़ी थी। अगले 10 साल तक उन्होंने अपने दोनों बिजनेस एक साथ चलाया। इसके बाद, अग्रवाल ने 1986 में स्टरलाइट इंडस्ट्रीज की नींव रखी। अग्रवाल को जल्द ही यह अहसास हो गया कि उन्हें इनपुट कॉस्ट को कंट्रोल करना होगा। इसके बाद उन्होंने जरूरी मेटल खरीदने के बजाय खुद से उसकी मैन्युफैक्चरिंग शुरू कर दी।

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