नीदरलैंड की कंपनी Prosus NV ने कहा है कि वह इंडियन कंपनी BillDesk का अधिग्रहण नहीं करेगा। उसने 3 अक्टूबर (सोमवार) को कहा कि उसने बिलडेस्क के अधिग्रहण से जुड़ी डील रद्द कर दी है। Prosus NI पेयू पेमेंट्स (PayU Payments) की पेरेंट कंपनी है। बिलडेस्क पेमेंट एग्रीगेटर कंपनी है।
Prosus ने स्टॉक एक्सचेंजों को बताया है, "PayU को 5 सितंबर को CCI का एप्रूवल मिल गया था। हालांकि, कुछ खास शर्तें 30 सितंबर तक पूरी नहीं की गईं। इससे डील की शर्तों के अनुसार एग्रीमेंट ऑटोमैटिकली रद्द हो गया है। प्रस्तावित ट्रांजेक्शन अब पूरा नहीं होगा। "
Prosus ने 31 अगस्त, 2021 को इस डील का ऐलान किया था। उसने कहा था कि उसने इंडिया में कुल 10 अरब डॉलर का निवेश किया है। यह 2018 में वॉलमार्ट की तरफ से फ्लिपकार्ट के अधिग्रहण के बाद देश में इंटरनेट से जुड़ी दूसरी सबसे बड़ी डील होती।
BillDesk की शुरुआत एमएन श्रीनिवासु, अजय कौशल और कार्तिक गणपति ने साल 2000 में की थी। यह कंपनी पेमेंट एक्सेप्ट करने के साथ ही उसे कलेक्ट करती है। यह पेमेंट एग्रीगेटर के रूप में 170 से ज्यादा तरीके उपलब्थ कराती है। यह भारत बिल पेमेंट सिस्टम (BBPS) के जरिए बिलर नेटवर्क सॉल्यूशन उपलब्ध कराती है। यह रेकरिंग पेमेंट के कलेक्शन में भी मदद करती है।
CCI ने कई हफ्तों की देरी और कई सवाल पूछने के बाद 5 सितंबर को इस डील को मंजूरी दे दी थी। 2021 में इस डील के ऐलान के बाद बिलडेस्क के श्रीनिवासु ने मनीकंट्रोल को PayU को कंपनी बेचने के पीछे वजहों के बारे में बताया था।
उन्होंने कहा था, "2021 की शुरुआत में हमने आईपीओ लाने के प्रोसेस के बारे में विचार करना शुरू किया था। तब हमारे साथ कुछ 15-16 साल पुराने इनवेस्टर्स थे। इसलिए हमारे ऊपर उनके लिए लिक्विडिटी का मौका उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी थी। जब हम आईपीओ के बारे में बातचीत कर रहे थे, तब Prosus ने हमसे संपर्क किया।"
उन्होंने कहा था कि Prosus के बारे में अच्छी बात यह है कि उनके पास फाइनेंशियल इनवेस्टमेंट के साथ अच्छी बिजनेस स्ट्रेटेजी भी है। दूसरा, इससे हमें जरूरी सपोर्ट के साथ ही ग्रोथ में भी मदद मिलने वाली थी। इससे उन इनवेस्टर्स को बाहर निकलने का अच्छा मौका मिलता, जो हमारे साथ लंबे समय से जुड़े हुए थे।