पर्सनल लोन अलग-अलग जरूरतों को पूरा करने के लिए तुरंत फंड्स की तलाश में रहने वाले लोगों के लिए वरदान साबित हो सकता है. इस बीच पर्सनल लोन की ब्याज दरों की बारीकियों को समझने से लोगों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिल सकती है.

पर्सनल लोन अलग-अलग जरूरतों को पूरा करने के लिए तुरंत फंड्स की तलाश में रहने वाले लोगों के लिए वरदान साबित हो सकता है. इस बीच पर्सनल लोन की ब्याज दरों की बारीकियों को समझने से लोगों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिल सकती है.
आइए जानते हैं कि पर्सनल लोन की ब्याज दरें कैसे काम करती हैं, इन दरों को कौन-से फैक्टर्स प्रभावित करते हैं और उनकी तुलना और कैलकुलेशन कैसे की जाती है. मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट के जरिए आप 50 लाख रुपए तक के पर्सनल लोन ऑफर चेक कर सकते हैं और अपनी जरूरतों के अनुसार सबसे अच्छा ऑफर चुन सकते हैं. यह 100% डिजिटल प्रोसेस कागजी कार्रवाई के झंझट से छुटकारा दिलाता है और इसमें कोई हिडेन चार्जेज नहीं है. यहां ब्याज दरें केवल 9.99% प्रति साल से शुरू होती हैं.
पर्सनल लोन क्या होता है?
पर्सनल लोन बैंकों और NBFCs की ओर से बिना कोई चीज गिरवी रखे दिया जाने वाला एक अनसिक्योर्ड लोन होता है. इसमें उधार लेने वाले की क्रेडिट हिस्ट्री और इनकम अहम भूमिका निभाते हैं. जबकि सिक्योर्ड लोन के लिए आपको कोई एसेट गिरवी रखना पड़ता है. पर्सनल लोन के जरिए प्राप्त हुए फंड्स का इस्तेमाल आप किसी भी काम के लिए कर सकते हैं, जैसे - चल रहे कई लोन्स को केवल एक में तब्दील करना, खरीदारी, छुट्टियों या मेडिकल खर्च. आपको उधार लिए गए अमाउंट को EMIs के जरिए एक निर्धारित पीरियड में चुकाना होता है.
भारत में बैंक और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs) 10% प्रति साल से भी कम ब्याज दर पर पर्सनल लोन उपलब्ध करा रही हैं.
फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस उधार लिए गए अमाउंट के आधार पर ब्याज दर का आंकलन करते हैं, जिसे प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है. इस दर को नॉमिनल एनुअल पर्सेंटेज (APR) भी कहा जाता है और इसमें अतिरिक्त फीस और लागतें शामिल हो सकती हैं.
APR उधार लेने की कुल लागत की सही जानकारी देती है. पर्सनल लोन पर विचार करते समय कुल रीपेमेंट अमाउंट में अचानक बदलाव से बचने के लिए ब्याज दर और उससे जुड़े चार्जेज पर ध्यान देना जरूरी है.
बैंकों की वेबसाइट्स के अनुसार, 17 अक्टूबर, 2024 तक ब्याज दरें इस प्रकार थीं -
एम्प्लॉयमेंट हिस्ट्री : पर्सनल लोन की ब्याज दरें तय करते समय लेंडर्स अक्सर आपकी एम्प्लॉयमेंट हिस्ट्री और कंपनी की क्रेडिबिलिटी चेक करते हैं. अगर आप एक अच्छी कंपनी में लंबे समय से काम कर रहे हैं, तो आपको बेहतर ब्याज दरें ऑफर की जा सकती हैं. उदाहरण के लिए, सरकारी कर्मचारियों को उनकी नौकरी की सुरक्षा के चलते प्राइवेट कर्मचारियों के मुकाबले कम ब्याज दरें ऑफर की जा सकती हैं.
ब्याज दरों और ऑफर्स की तुलना : कई एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म उपलब्ध होने के कारण फिलहाल पर्सनल लोन की दरों की तुलना करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है. कई ऐसी वेबसाइट्स मौजूद हैं, जो आपको आपकी जरूरतों के हिसाब से सबसे अच्छे ऑफर चुनने में मदद कर सकती हैं. किसी बैंक या NBFC के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने से आपको सस्ती ब्याज दरों पर पर्सनल लोन मिल सकता है. पुराने ग्राहकों को अक्सर कस्टमाइज्ड लोन प्लान और कम ब्याज दरें ऑफर की जाती हैं.
क्रेडिट स्कोर और रीपेमेंट हिस्ट्री : आपका क्रेडिट स्कोर ऑफर की जाने वाली ब्याज दरों में एक अहम भूमिका निभाता है. 750 या उससे ज्यादा का स्कोर कम ब्याज दर मिलने की संभावनाओं को काफी बढ़ा देता है. एक अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाए रखने के लिए आपको मौजूदा लोन्स और क्रेडिट कार्ड बिलों का समय पर भुगतान करना और साथ ही नई क्रेडिट पूछताछ को सीमित करना होगा.
कैसे करें ब्याज की कैलकुलेशन : अलग-अलग लेंडर्स ब्याज दरों की कैलकुलेशन के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, जिसका असर उधार की कुल लागत पर पड़ता है. यह समझना जरूरी है कि आपका लोन फिक्स्ड है या वेरिएबल. फिक्स्ड-रेट लोन्स पूरी लोन टर्म के दौरान समान ब्याज दर बनाए रखते हैं. इसके विपरीत, वेरिएबल रेट लोन्स कम दरों से शुरू हो सकते हैं, लेकिन समय के साथ इनमें उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जिससे लंबे समय में लागत बढ़ सकती है.
सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड लोन : सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड लोन में अंतर केवल गिरवी का है. सिक्योर्ड लोन में आपको कोई एसेट गिरवी रखना पड़ता है, इसलिए यहां ब्याज दर काफी कम रहती हैं. इसमें लेंडर्स के लिए जोखिम कम रहता है. वहीं अनसिक्योर्ड लोन के मामले में गिरवी के बजाय क्रेडिट स्कोर को महत्व दिया जाता है. इसके चलते यहां सिक्योर्ड लोन के मुकाबले ज्यादा ब्याज दर ऑफर की जाती हैं.
रीपेमेंट पीरियड : लोन को चुकाने का पीरियड भी ब्याज दरों को प्रभावित कर सकता है. लंबे रीपेमेंट पीरियड के लिए लेंडर अक्सर ज्यादा ब्याज दर की पेशकश करते हैं. क्योंकि इसमें रिस्क ज्यादा होता है. इस बीच कम पीरियड का लोन चुनने से ब्याज दरें कम हो सकती हैं.
EMI के रूप में देय कुल अमाउंट की कैलकुलेशन करने के लिए आप पर्सनल लोन कैलकुलेटर का इस्तेमाल कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, अगर आपको 12 महीने के पीरियड के लिए 10% की ब्याज दर पर 1 लाख रुपए का पर्सनल लोन चाहिए, तो आपकी अनुमानित EMI लगभग 8,793 रुपए होगी, जिसमें लोन पीरियड के दौरान चुकाया जाने वाला कुल ब्याज लगभग 5,500 रुपए होगा. ऑनलाइन पर्सनल लोन कैलकुलेटर का इस्तेमाल करके इस कैलकुलेशन को आसान बनाया जा सकता है.
आमतौर पर, एडवर्टाइजमेंट में पर्सनल लोन की रियल ब्याज दर नहीं बताई जाती है. लेंडर्स अक्सर ब्याज दर के अलावा प्रोसेसिंग फीस, सर्विस फीस और जीएसटी भी लेते हैं, जिसे नॉमिनल APR भी कहा जाता है. लोन एप्लीकेशन जमा करने से पहले लेंडर की फाइनल ब्याज दर जरूर चेक करें.
पर्सनल लोन जल्द हासिल करने के लिए आप मनीकंट्रोल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का रूख कर सकते हैं. मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट के जरिए आप 50 लाख रुपए तक के पर्सनल लोन ऑफर चेक कर सकते हैं और अपनी जरूरतों के अनुसार सबसे अच्छा ऑफर चुन सकते हैं. यह 100% डिजिटल प्रोसेस कागजी कार्रवाई के झंझट से छुटकारा दिलाता है और इसमें कोई हिडेन चार्जेज नहीं है. यहां ब्याज दरें केवल 9.99% प्रति साल से शुरू होती हैं.
कुल मिलाकर, पर्सनल लोन की ब्याज दरों को समझना नए लोगों के लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है. लेकिन, ब्याज दरें कैसे काम करती हैं और पर्सनल लोन की मंजूरी को प्रभावित करने वाले अलग-अलग फैक्टर्स को समझकर, आप अपनी जरूरतों के हिसाब से सबसे अच्छा ऑफर चुन सकते हैं.
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