अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से अमेरिका में आने वाले विदेशी सामान पर लगाए गए नए टैरिफ से आईफोन मेकर एपल (Apple) की लागत मौजूदा अवधि में 90 करोड़ डॉलर बढ़ जाएगी। यह बात एपल के सीईओ टिम कुक ने कही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, तिमाही वित्तीय रिजल्ट जारी करने के बाद एक कॉन्फ्रेंस कॉल पर उन्होंने एनालिस्ट्स से कहा, "हमारा अनुमान है कि टैरिफ से हमारी लागत में 90 करोड़ डॉलर की बढ़ोतरी होगी।"
कुक ने चेतावनी देते हुए कहा, "इस अनुमान का इस्तेमाल भविष्य की तिमाहियों के लिए अनुमान लगाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि कुछ ऐसे यूनीक फैक्टर हैं, जो अप्रैल-जून तिमाही में फायदा पहुंचाते हैं।"
चीन में एपल की बिक्री अनुमान से कम
एपल ने इस बात की भी जानकारी दी है कि चीन में बिक्री एनालिस्ट्स के अनुमान से कम रही। कंपनी ने एक बयान में बताया है कि जनवरी-मार्च 2025 तिमाही में चीन से कंपनी का रेवेन्यू 2.3 प्रतिशत गिरकर 16 अरब डॉलर हो गया। एनालिस्ट्स ने 16.83 अरब डॉलर के रेवेन्यू का अनुमान लगाया था। मार्च तिमाही में एपल का कुल रेवेन्यू सालाना आधार पर 5.12 प्रतिशत उछलकर 95.40 अरब डॉलर पर पहुंच गया। एक साल पहले यह 90.75 अरब डॉलर था।
इस बीच एक खबर यह भी है कि सीएनबीसी से बातचीत में टिम कुक ने कहा है कि अमेरिका में बिकने वाले अधिकतर आईफोन की कंट्री ऑफ ओरिजिन भारत होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी के चलते कंपनी अपनी सप्लाई चेन को चीन से दूर ले जा रही है। एपल की बदली हुई पॉलिसी में अब सिर्फ स्थानीय बिक्री के लिए ही नहीं बल्कि कंपनी की वैश्विक सप्लाई चेन में भी भारत की स्थिति मजबूत हुई है। एपल के सीईओ ने उम्मीद जताई है कि अमेरिका में बिकने वाले अधिकतर आईफोन भारत में बने होंगे। वहीं बाकी प्रोडक्ट्स की बात करें तो अमेरिका में बिकने वाले अधिकतर आईपैड, मैकबुक, एपल वॉच और एयरपॉड्स का प्रोडक्शन वियतनाम में होगा।