Zoho ने 70 करोड़ डॉलर के सेमीकंडक्टर प्लांट का प्लान टाला, श्रीधर वेंबू बोले- टेक पर नहीं था उतना भरोसा

हालांकि Zoho ने भविष्य के निवेशों से इनकार नहीं किया है लेकिन इसका यह वर्तमान विराम, ग्लोबल टेक डायनैमिक्स और डॉमेस्टिक पॉलिसी डेवलपमेंट्स के बीच प्राइवेट कंपनियों द्वारा अपनाई जा सकने वाली सतर्क अप्रोच को दर्शाता है

अपडेटेड May 01, 2025 पर 11:16 PM
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Zoho ने प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए नई एंटिटी Silectric Semiconductor Manufacturing को भी इनकॉरपोरेट किया था।

जोहो कॉरपोरेशन ने एक कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट बनाने के अपने महत्वाकांक्षी 70 करोड़ डॉलर के प्लान को स्थगित कर दिया है। कंपनी ने इसके पीछे तकनीकी अनिश्चितताओं और चुने गए मार्ग पर पूरे भरोसे के बिना आगे बढ़ने की इच्छा न होने का हवाला दिया है। इस फैसले की घोषणा कंपनी के फाउंडर और चीफ साइंटिस्ट श्रीधर वेंबू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की।

उन्होंने एक पोस्ट में लिखा, 'हमारे सेमीकंडक्टर फैब इनवेस्टमेंट प्लान पर हम करदाताओं के पैसे लेने से पहले टेक्नोलॉजी पाथ के बारे में पूरी तरह सुनिश्चित होना चाहते थे। चूंकि इस कारोबार में पूंजी की इतनी ज्यादा जरूरत होती है कि इसके लिए सरकारी सपोर्ट की जरूरत है। हमें टेक पर उतना भरोसा नहीं था, इसलिए हमारे बोर्ड ने इस विचार को फिलहाल टालने का फैसला किया है, तब तक जब तक कि हम एक बेहतर टेक अप्रोच नहीं खोज लेते।'

ISM के तहत इंसेंटिव के लिए जून 2023 में किया था आवेदन


तमिलनाडु स्थित सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (SaaS) फर्म जोहो ने प्रस्तावित फैब्रिकेशन यूनिट को सपोर्ट करने के लिए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत इंसेंटिव के लिए जून 2023 में आवेदन किया था। इसने प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए एक नई एंटिटी, Silectric Semiconductor Manufacturing को भी इनकॉरपोरेट किया था।

केंद्र सरकार से सपोर्ट मांगने से पहले, जोहो ने तमिलनाडु के तेनकासी में एक सेमीकंडक्टर डिजाइन इनीशिएटिव शुरू करने के प्लान्स से पर्दा उठाया था। यह भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में एंटर करने की कंपनी की व्यापक महत्वाकांक्षाओं का हिस्सा है।

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क्या है ISM

ISM घरेलू चिप उत्पादन और पैकेजिंग क्षमताओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई 76,000 करोड़ रुपये की सरकारी सपोर्ट वाली स्कीम है। इसने अब तक 5 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इनमें से 4 चिप पैकेजिंग से संबंधित हैं। गुजरात के धोलेरा में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की फैसिलिटी इस योजना के तहत एकमात्र स्वीकृत चिप फैब्रिकेशन फैक्ट्री बनी हुई है। फरवरी 2024 में अप्रूव्ड टाटा चिप फैब 2027 तक ऑपरेशंस शुरू करने वाला है और इससे लगभग 2,000 नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।

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