पिछले महीने की शुरुआत में आरबीआई ने इंटरेस्ट रेट में 50 बेसिस प्वाइंट्स की कमी की थी। यह रेपो रेट में उम्मीद से ज्यादा कमी थी। हालांकि, आरबीआई ने इकोनॉमिक ग्रोथ की रफ्तार बढ़ाने के लिए रेपो रेट में यह कमी की थी। इस साल आरबीआई रेपो रेट में लगातार दो बार कमी कर चुका है। हाल तक एक्सपर्ट्स का यह मानना था कि आरबीआई अगस्त में रेपो रेट में कमी नहीं करेगा। लेकिन, 14 जुलाई को रिटेल इनफ्लेशन का डेटा आने के बाद एक्सपर्ट्स की राय बदलती दिख रही है।
जून में रिटेल इनफ्लेशन में तेज गिरावट
जून में रिटेल इनफ्लेशन में तेज गिरावट देखने को मिली है। ऐसे में अगस्त में RBI रेपो रेट में कमी कर सकता है। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एक इंटरव्यू में कहा था, "हमारा रुख न्यूट्रल है। इसका मतलब है कि न सिर्फ करेंट डेटा बल्कि आउटलुक के हिसाब से हम किसी भी दिशा में फैसला ले सकते है।" दरअसल, आरबीआई काफी समय से इनफ्लेशन को कंट्रोल में करने पर फोकस करता आया है। जब इनफ्लेशन पूरी तरह से नियंत्रण में आ गया है तो रेपो रेट में कमी के रास्ते में अब किसी तरह की बाधा नहीं रह गई है। RBI की मॉनेटरी पॉलिसी की अलगी बैठक 4 अगस्त को शुरू होने वाली है।
इकोनॉमिक ग्रोथ बढ़ाने पर RBI का फोकस
RBI का फोकस अब ग्रोथ की रफ्तार बढ़ाने पर होगा। अगर केंद्रीय बैंक रेपो रेट में कमी करता है तो इससे कर्ज सस्ता होगा। इससे इकोनॉमी में डिमांड बढ़ेगी, जिससे कंजम्प्शन को बढ़ावा मिलेगा। इस साल रेपो रेट में कमी के बाद बैंकों ने होम लोन और दूसरे लोन के इंटरेस्ट में कमी की है। लेकिन, अभी डिमांड पर इसका ज्यादा असर नहीं दिखा है। जून के ऑटो सेल्स के आंकड़ों पर इसका असर देखने को नहीं मिला। शहरी इलाकों में डिमांड कमजोर बनी हुई है।
इंटरेस्ट रेट घटने से इकोनॉमी में डिमांड बढ़ेगी
केंद्रीय बैंक इकोनॉमी में मांग बढ़ाने के लिए कर्ज को सस्ता करने के लिए कदम उठा सकता है। कर्ज सस्ता होने से रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर को खास फायदा होगा। अगर होम लोन सस्ता होने से लोगों की दिलचस्पी घर खरीदने में बढ़ती है तो इससे स्टील, सीमेंट, लाइटिंग सहित की दूसरे सेक्टर में भी तेजी देखने को मिलेगी। ऑटो सेक्टर में सेल्स बढ़ने का फायदा ऑटो एंसिलियरी और टायर बनाने वाली कंपनियों को मिलेगा।
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इंडिया दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था
RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि 6.5 फीसदी की जीडीपी ग्रोथ अनुमान के मुताबिक है। उन्होंने कहा था कि इकोनॉमी के बारे में मिलेजुले संकेत मिल रहे हैं। अच्छी बात यह है कि इस साल मानसून की बारिश बेहतर रहने की उम्मीद है। कंज्यूमर सर्वे के नतीजें भी उत्साहजनक हैं। टैरिफ को लेकर बातचीत चल रही है। इससे ग्रोथ की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, इंडिया अब भी दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है।