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RBI MPC 2023: रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, महंगाई से मिल सकती है राहत, आरबीआई ने बढ़ाया GDP Growth का अनुमान

RBI MPC: कोरोना महामारी के दौरान रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ था। अगस्त 2018 के बाद पहली बार मई 2022 में ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हुआ है। इससे पहले लगातार दस बार एमपीसी की बैठक में इसे स्थिर रखने का फैसला किया गया था। हालांकि फिर एकाएक मई 2022 में एमपीसी की अचानक हुई बैठक में इसे बढ़ाया गया और तब से बढ़ोतरी का सिलसिला लगातार जारी है

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Apr 06, 2023 पर 10:34 AM
RBI MPC 2023: रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, महंगाई से मिल सकती है राहत, आरबीआई ने बढ़ाया GDP Growth का अनुमान
RBI अगर रेपो रेट में बढ़ोतरी करता है तो इसका आम लोगों से लेकर खास तक पर असर पड़ता है। हालांकि इससे सिर्फ कर्ज महंगा होता है, ऐसा नहीं है। रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद बैंक जमा दरों में भी बढ़ोतरी कर सकते हैं।

RBI MPC 2023: चालू वित्त वर्ष 2023-24 में केंद्रीय बैंक RBI ने अपनी पहली मौद्रिक नीति का ऐलान कर दिया है। इस बार आरबीआई ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया है और रेपो रेट (Repo Rate) 6.50 फीसदी पर बना हुआ है। इससे पहले मई 2022 के बाद से आरबीआई ने छह बार दरों में बढ़ोतरी का फैसला किया था। यह फरवरी 2019 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि अर्थव्‍यवस्‍था और महंगाई को घरेलू और वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियां मिल रही हैं जैसे कि बैंकिंग संकट, प्राइसिंग प्रेशन, भू-राजनीतिक तनाव। हालांकि इसके बावजूद एमपीसी बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया गया है।

रेपो रेट में बढ़ोतरी का मार्केट पर पॉजिटिव असर दिख रहा है। इस ऐलान के पहले सेंसेक्स-निफ्टी रेड जोन में थे लेकिन रेपो रेट को स्थिर रखने के फैसले से इसमें शानदार तेजी आई और ग्रीन जोन में पहुंच गए।

मई 2022 से छह बार बढ़ चुका था Repo Rate

कोरोना महामारी के दौरान रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ था। अगस्त 2018 के बाद पहली बार मई 2022 में ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हुआ है। इससे पहले लगातार दस बार एमपीसी की बैठक में इसे स्थिर रखने का फैसला किया गया था। हालांकि फिर एकाएक मई 2022 में एमपीसी की अचानक हुई बैठक में इसे 0.40 फीसदी बढ़ाकर 4 फीसदी से 4.40 फीसदी कर दिया। मई 2022 से रेपो रेट में बढ़ोतरी का सिलसिला लगातार जारी है। मई से अब तक दरें छह बार में बढ़कर 6.50 फीसदी पर पहुंच गई जो इस बार की एमपीसी बैठक के बाद भी बरकरार है।

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