साल 2022 के तीसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर) में देश के व्यापार घाटे (Trade Deficit) के रिकॉर्ड उंचे स्तर पर बना रहना सामान्य होगा और डॉलर के मुकाबले रुपये की वैल्यू गिरकर 82 के स्तर तक जा सकती है। नोमुरा (Nomura) के एनालिस्ट्स ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में ये बातें कहीं।
एनालिस्ट्स ने यह भी अनुमान जताया कि वित्त वर्ष 2023 में देश चालू खाता घाटा (CAD) बढ़कर जीडीपी के 3.3 फीसदी पर पहुंच सकता है, जो वित्त वर्ष 2022 में 1.2 फीसदी था। एनालिस्ट्स ने चालू खाता घाटे में बढ़ोतरी के पीछे क्रूड ऑयल उत्पादन में हालिया टैक्स नीति जैसे कई पहलुओं को जिम्मेदार बताया है।
रिपोर्ट में कहा गया है, "जून में भारत का मर्चेंडाइज व्यापार घाटा बढ़कर 25.6 अरब डॉलर के एक और रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह धीमा एक्सपोर्ट और इंपोर्ट में भारी उछाल की ओर इशारा करता है।" इससे पहले मई में देश का व्यापार घाटा 24.3 अरब डॉलर रहा था।
जून में एक्सपोर्ट की सालाना ग्रोथ धीमी होकर 16.8 फीसदी रही, जो इसके ठीक पिछले महीने मई में 20.6 फीसदी थी। वहीं इंपोर्ट में जून में करीब 51 फीसदी की उछाल देखी गई, जो इसके पहले मई में 62.8 फीसदी थी। व्यापार घाटे में बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह ग्लोबल लेवल पर कमोडिटी की कीमतों में आई उछाल है, जिसके चलते एनर्जी और मेटल जैसी इंपोर्ट होने वाली अहम वस्तुओं की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।
चालू खाता घाटा में बढ़ोतरी और FPI की बिकवाली का असर रुपये की सेहत पर पड़ना जारी रहेगा और सितंबर तिमाही में यह डॉलर के मुकाबले 82 रुपये के स्तर तक जा सकता है, वहीं दिसंबर तिमाही में इसके थोड़ा बढ़कर 81 रुपये के स्तर तक रहने का अनुमान है। बता दें कि विदेशी निवेशकों (FPI) ने इस साल अब तक भारत से करीब 28.9 अरब डॉलर की निकासी की है।
इसके अलावा अमेरिकी सेंट्रल बैंक की तरफ से मॉनिटरी पॉलिसी में सख्ती से भी डॉलर में मजबूती दिखेगी और इसके चलते अमेरिका में चौथी तिमाही में मंदी भी आ सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है, "RBI ने मंहगाई दर को 4 फीसदी पर रखने का लक्ष्य रखा है और इसे लेकर RBI के रुख पर हम चिंतित हैं और हमारा मानना है कि यह विदेशी निवेशकों को घरेलू बॉन्ड में निवेश करने से हतोत्साहित कर सकता है।"