उबर (Uber) के किराए में बढ़ोतरी ने इस कंपनी के CEO को भी हैरान कर दिया है। हाल में स्टीवन लेवी (Steven Levy) नामक पत्रकार ने न्यूयॉर्क (New York) के मैनहट्टन इलाके में 4 किलोमीटर की यात्रा के लिए उबर की सर्विस का इस्तेमाल किया और इसके लिए उन्हें 51.69 डॉलर (तकरीबन 4,300 रुपये) चुकाने पड़े। इसमें ड्राइवर का टिप भी शामिल था।
स्टीवन लेवी ने एक इंटरव्यू के दौरान जब उबर के CEO दारा खोसरोशाही (Dara Khosrowshahi) को किराए की रसीद दिखाई, तो वह हैरान रह गए। इस पर उनकी प्रतिक्रिया इस तरह थी, 'हे भगवान।' खोसरोशाही को किराया '20 डॉलर' रहने का अनुमान था और यह जानकर हैरान रह गए कि किराया उनके अनुमान से दोगुने से भी ज्यादा है।
पत्रकार ने CEO को यह भी बताया कि 'सर्ज प्राइसिंग' सिस्टम के कारण कैब की बुकिंग से सिर्फ 5 मिनट पहले किराया 20 डॉलर ज्यादा था। किराए को लेकर इस स्ट्रैटेजी के बारे में पूछे जाने पर खोसरोशाही ने इनफ्लेशन और लेबर कॉस्ट में बढ़ोतरी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने पत्रकार से कहा, 'सब कुछ काफी महंगा है।'
हालांकि, फोर्ब्स (Forbes) की एक रिपोर्ट उबर के CEO के जवाब को गलत ठहराती है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 से 2022 के दौरान अमेरिका में उबर के किराए में इनफ्लेशन के मुकाबले चार गुना बढ़ोतरी हुई है। पिछले 4 साल में उबर के किराए में तकरीबन 83 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई है।
इससे पहले खोसरोशाही ने दावा किया था कि कोरोना महामारी के दौरान ड्राइवरों की कमी के कारण उबर के किराए में बढ़ोतरी हो रही है। हालांकि, अगस्त 2022 में इस ऐप से जुड़े ड्राइवरों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। 'सर्ज प्राइसिंग' की वजह से भारत में बिना बारिश और त्योहार वाले मौसम के दौरान महानगरों में 5 किलोमीटर का किराया 300 रुपये तक हो सकता है।
'सर्ज प्राइसिंग' विवाद के बावजूद दूसरी तिमाही में उबर की परफॉर्मेंस काफी अच्छी रही है। इस दौरान, कंपनी का नेट प्रॉफिट 39.4 करोड़ डॉलर रहा। पिछले साल की इसी अवधि में कंपनी को 2.6 अरब डॉलर का घाटा हुआ। कंपनी को 2009 में शुरू किया गया था और उसके बाद से पहली बार कंपनी ने मुनाफा हासिल किया है।