केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) ने जीटीएल लिमिटेड (GTL Ltd), उसके डायरेक्टरों और कुछ अज्ञात बैंकरों के खिलाफ 4,760 करोड़ रुपये के लोन फ्रॉड मामले में केस दर्ज किया है। आरोप है कि इन लोगों ने लोन के पैसों को डायवर्ट करके बैंकों के एक कंसोर्टियम को 4,760 करोड़ रुपये का चूना लगाया है। इस कंसोर्टियम में 24 बैंक शामिल हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, कंपनी ने कंसोर्टियम से धोखाधड़ी करके लोन हासिल किया और इस लोन का अधिकांश पैसा कुछ बैंक अधिकारियों और वेंडरों के साथ मिलीभगत करके हड़प लिया। धोखाधड़ी कथित तौर पर वर्ष 2009-2012 के बीच हुई थी।
जांच में पाया गया कि GTL कुछ वेंडरों को हर साल बड़ी मात्रा में एडवांस राशि देती थी, लेकिन इसके बदले किसी सामान की सप्लाई नहीं होती थी। बाद में इन एडवांस का प्रावधान किया गया। सीबीआई ने बताया कि फ्रॉड को आसान बनाने के लिए, दोषियों ने GTL लिमिटेड के साथ मिलकर कथित तौर पर कई वेंडर कंपनियां बनाई थीं। मनीकंट्रोल ने FIR की एक कॉपी देखी है।
कंसोर्टियम में शामिल बैंकों में से ICICI बैंक का GTL लिमिटेड पर 650 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ इंडिया का 467 करोड़ रुपये और कैनरा बैंक का 412 करोड़ रुपये बकाया है।
कंपनी ने इन बैंकों से कुछ खास बिजनेस गतिविधियों के लिए कम अवधि के लोन दिए थे और बैंक से वादा किया था कि इन पैसों का इस्तेमाल बताए गए उद्देश्यों के लिए ही होगा। सीबीआई ने बताया कि लेकिन लोन का पैसा मिलने के बाद अधिकतर राशि का इस्तेमाल कंपनी ने बताए गए उद्देश्यों के लिए नहीं किया था।
एजेंसी ने FIR ने कहा, "इस तरह मेसर्स जीटीएल लिमिटेड ने बैंकों को धोखा दिया और उसके बाद बैंकों से मिले पैसों का दुरुपयोग किया।"
जीटीएल लिमिटेड को साल 1987 में ग्लोबल ग्रुप के मनोज तिरोडकर ने शुरू किया था। यह भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में टेलीकॉम ऑपरेटरों को टेलीकॉम नेटवर्क को लगाने से जुड़ी सेवाएं, उसका संचालन और रखरखाव आदि की सेवाएं मुहैया करने के कारोबार में लगी हुई है।