यूक्रेन पर रूस का हमला 8 दिन से जारी है। इस बीच अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं। इनमें ज्यादातर आर्थिक प्रतिबंध हैं। रूस की इकोनॉमी पर इनका असर पड़ता दिख रहा है। आइए जानते हैं अब तक अमेरिका और यूरोपीय देशों ने क्या-क्या प्रतिबंध लगाए हैं। हम यह भी जानेंगे कि इनका रूस में अलग-अलग सेक्टर पर कितना असर पड़ रहा है।
रूस के फाइनेंशियल सेक्टर की कमर टूटी
सबसे कड़े प्रतिबंध रूस के फाइनेंशियल सेक्टर पर लगाए गए हैं। यूरोपीय यूनियन ने बुधवार को रूस के बैंकों को SWIFT Messaging System से बाहर कर दिया। यह मनी ट्रांसफर का बहुत ही आसान, इफेक्टिव और सुरक्षित पेमेंट गेटवे है। इस बैन के बाद रूस के सबसे बैंक सबेरबैंक ने बुधवार को कहा कि वह यूरोपीय मार्केट से बाहर जा रहा है। यूरोपीय यूनियन ने रशियन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट फंड (RDIF) में भी नया इनवेस्टमेंट नहीं करने का फैसला किया है। इंग्लैंड ने भी कहा है कि वह आरडीआईएफ में नया निवेश नहीं करेगा।
रूस के फाइनेंशियल सेक्टर पर प्रतिबंधों का असर दिखने लगा है। रूस की मुद्रा रूबल में बड़ी गिरावट आई है। इसे और गिरने से बचाने के लिए रूस के केंद्रीय बैंक ने मुख्य ब्याज दर को बढ़ाकर दोगुना कर दिया है। उधर, दुनिया की सबसे बड़ी पेमेंट कंपनियों वीजा और मास्टरकार्ड ने कहा है कि वे रूसी बैंकों पर प्रतिबंध लगा रही हैं, जिससे वे उनके पेमेंट नेटवर्क्स का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। सबसे बड़े अमेरिकी बैंकों में से एक अमेरिकन एक्सप्रेस ने भी कहा है कि वह रूस के बैंकों के साथ सभी तरह के ट्रांजेक्शन पर रोक लगा रहा है।
रूस की एयरलाइंस इंडस्ट्री के पंख कटे
अमेरिका और यूरोपीय देशों के प्रतिबंधों का बड़ा असर रूस की एयरलाइंस इंडस्ट्री पर पड़ा है। रूस की एयरलाइंस एरोफ्लोट पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इससे यह यूरोपीय देशों, इंग्लैंड और कनाडा के लिए उड़ान नहीं भर सकती। हालांकि, इससे बौखलाए रूस ने भी इन देशों की फ्लाइट्स पर रोक लगा दी है। यूरोपीय यूनियन और कनाडा ने रूस को एयरक्राफ्ट, उसके पार्ट्स और इक्विपमेंट की सप्लाई रोक दी है। ध्यान देने वाली बात है कि दुनिया में एयरक्राफ्ट बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल एयरबस एक यूरोपीय कंपनी है। इसलिए इन प्रतिबंधों से रूस की एयरलाइंस इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा है।
ब्रिटने ने रूसी झंडे और रूसी कंपनियों के सभी समुद्री जहाजों को अपने बंदरगार का इस्तेमाल करने से रोक दिया है। शनिवार को फ्रांस ने पीएसबी बैंक से जुड़े एक रूसी कार्गो शिप को पकड़ा। इसे यूरोपीय प्रतिबंधों का उल्लंघन करते पाया गया। दुनिया की सबसे बड़ी ऑटो कंपनियों में से एक वोल्वो ग्रुप ने रूस को ट्रक और दूसरी गाड़ियों की सप्लाई बंद करने का ऐलान किया है। उसने कहा है कि वह रूस में अपने प्लांट में उत्पादन भी बंद करने जा रही है।
रूस के एनर्जी सेक्टर की हवा निकली
दुनिया के तीन सबसे बड़े कनटेनर शिपिंग ग्रुप डेनमार्क के Maersk, स्विट्जरलैंड के MSC और फ्रांस के CMA CGM ने कहा है कि वे रूस को गैर-जरूरी सामानों की डिलीवरी रोकने जा रहे हैं।
रूस के एनर्जी सेक्टर पर भी प्रतिबंधों का बड़ा असर पड़ा है। सबसे बड़ा कदम जर्मनी ने उठाया है। उसने कहा है कि वह नोर्ट स्ट्रीम 2 गैस पाइपलाइन के सर्टिफिकेशन प्रोसेस पर रोक लगा रहा है। यह पाइप लाइन रूस से जर्मनी को गैस की सप्लाई के लिए बहुत अहम है। रूस की सबसे बड़ी ऑयल कंपनियों में से एक गजप्रोम को पश्चिमी देशों के मार्केट से फंड जुटाने से रोक दिया गया है।
यूरोपीय देशों के लिए रूस की एनर्जी सेक्टर पर प्रतिबंध लगाना बहुत मुश्किल रहा है। इसकी वजह है कि कई यूरोपीय देश फ्यूल की जरूरत पूरी करने के लिए काफी ज्यादा रूस पर डिपेंड करते हैं। उदाहरण के लिए जर्मनी और इटली रूस से बहुत ज्यादा हाइड्रोकार्बन का इंपोर्ट करते हैं।
इंडस्ट्रियल गुड्स की सप्लाई भी रुकी
जापान ने बीते शुक्रवार को रूस के खिलाफ बड़ा ऐलान किया। उसने कहा कि वह रूस की सेना से जुड़े संगठनों को सेमीकंडक्टर्स और इस तरह के दूसरे आइटम्स का एक्सपोर्ट नहीं करेगा। माना जा रहा है कि इसका रूस के डिफेंस सेक्टर पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान सेमीकंडक्टर्स और इस तरह के दूसरे आइटम्स के सबसे बड़े एक्सपोर्टर्स हैं। सेमीकंडक्टर्स का डिफेंस प्रोडक्शन में बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है। यूरोपीय देश भी रूस पर इसी तरह के प्रतिबंध लगाने के बारे में प्लान कर रहे हैं।
यूरोपीय यूनियन ने रूस की मीडिया पर भी बैन लगाए हैं। रूस की सरकार नियंत्रित RT और स्पुतनिक को यूरोप में अपने प्रोग्राम दिखाने से रोक दिया गया है। ये मीडिया कंपनियां सैटेलाइट, केबल, एप और इंटरनेट के जरिए यूरोपीय देशों में अपने प्रोग्राम नहीं दिखा सकेंगी। RT की सहायक कंपनियों पर भी रोक लगाई गई है। इससे वे अंग्रेजी, जर्मन, फ्रेंच और स्पैनिश में भी अपने प्रोग्राम यूरोपीय देशों में टेलीकास्ट नहीं कर सकेंगी।