देश में तीन ऐसे बैंक हैं जिनके डूबने का खतरा नहीं उठाया जा सकता है यानी कि इन्हें कुछ हुआ तो सरकार खुद इन्हें बचाने की कोशिश करेगी। इस साल 2023 में भी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), ICICI Bank और HDFC Bank ने अपनी अहमियत साबित की और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने इन्हें 'टू बिग टू फेल' की श्रेणी में रखा। ये बैंक डोमेस्टिक सिस्टमैटिकली इंपोर्टेंट बैंक्स (D-SIBs) हैं यानी कि घरेलू सिस्टम के लिए अहम बैंक हैं। हालांकि अब अहम बदलाव ये हुआ है कि ICICI Bank के पोजिशन में बदलाव नहीं हुआ है लेकिन बाकी दोनों बैंक का लेवल बढ़ा है यानी और हाई बकेट में चले गए हैं। यह बदलाव 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी होगा।
1 अप्रैल 2025 से क्या बदल जाएगा?
D-SIBs यानी घरेलू सिस्टम के लिए महत्वपूर्ण बैंकों को एडीशनल कॉमन इक्विटी टियर-1 (CET1) मेंटेन करना होता है। RBI के लेटेस्ट प्रेस रिलीज के मुताबिक एसबीआई को रिस्क-वेटेड एसेट्स के फीसदी के रूप में अतिरिक्त 0.80 फीसदी CET1 के रूप में रखना होगा। वहीं HDFC Bank को अतिरिक्त 0.40 फीसदी और ICICI Bank को अतिरिक्त 0.20 फीसदी मेंटेन करना होगा। हालांकि यह लेवल 1 अप्रैल 2025 से मेंटेन करना है। अभी SBI के लिए यह सरचार्ज 0.60 फीसदी और HDFC Bank के लिए 0.20 फीसदी है।
ये ऐसे बैंक होते हैं जो सिस्टम के लिए इतने अहम होते हैं कि जिनके डूबने पर पूरे फाइनेंशियल सिस्टम को झटका लग सकता है और अस्थिरता आ सकती है। इस प्रकार के बैंकों पर RBI पर करीबी निगाह रहती है क्योंकि इन्हें टू-बिग-टू-फेल माना जाता है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक इस प्रकार के बैंकों पर 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट के बाद से ही नजर रखने लगे थे। RBI ने पहली बार इसका फ्रेमवर्क 22 जुलाई 2014 को जारी किया था। इसके तहत 2015 से RBI को D-SIBs का खुलासा करना होता है यानी कि सिस्टम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बैंकों के बारे में बताना होता है और फिर उनकी महत्ता के हिसाब से उन्हें उचित बकेट में रखना होता है।