सोनी ग्रुप (Sony Group) ने आधिकारिक तौर पर जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Zee Entertainment Enterprises Ltd) को बता दिया है कि वह अपनी भारतीय इकाई को उसके साथ मर्ज करने की योजना को रद्द करने पर विचार कर रही है। ब्लूमबर्ग ने सोमवार 22 जनवरी को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। इसके साथ ही पिछले 2 सालों से दोनों कंपनियों के बीच मर्जर को लेकर जारी तमाम कोशिशों का अंत हो गया है। यह Zee एटंरटेनमेंट के लिए एक झटका हो सकता है, जो पिछले कुछ समय से चुनौतियों का सामना कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, जापान की दिग्गज एंटरटेनमेंट कंपनी सोनी ने सोमवार को ही ZEE को टर्मिनेशन लेटर भेजा है और वह दिन में किसी समय स्टॉक एक्सचेंजों को भी इस संबंध में सूचित कर सकती है।
ब्लूमबर्ग की ओर से देख लेटर के मुताबिक, सोनी ने मर्जर की समझौते से जुड़ी शर्तों को पूरा नहीं करने को टर्मिनेशन का कारण बताया। सूत्रों के मुताबिक, दोनों के बीच Zee के मौजूदा सीईओ पुनित गोयनका की भूमिका को लेकर मतभेद था।
दोनों कंपनियों के बीच पहले इस बात पर सहमति बनी थी कि मर्जर के बाद बनने वाली नई इकाई की अगुआई पुनीत गोयनका करेंगे। हालांकि अब SEBI की ओर से पुनीत गोयनका के कुछ एक्शन से जुड़ी जांच को देखते हुए सोनी इस बात के लिए तैयार नहीं हैं। यह दोनों दिग्गजों के बीच मर्जर डील टूटने का बड़ा कारण माना जा रहा है।
अगर यह मर्जर होता तो Zee और सोनी करीब 10 अरब डॉलर के वैल्यूएशन वाली एक विशाल मीडिया कंपनी बनाते, जिसके पास नेटफ्लिक्स और एमेजॉन जैसे ग्लोबल दिग्गजों को टक्कर देने की ताकत होती।
बता दें कि SEBI ने पिछले साल जून में आरोप लगाया था कि ज़ी अपने चेयरमैन सुभाष चंद्रा से जुड़ी निजी फाइनेसिंग डील को छुपाने के लिए लोन की रिकवरी के सिलसिले में फर्जी दावा कर रहा है। मार्केट रेगुलेटर ने अपने अंतरिम ऑर्डर में चंद्रा और उनके बेटे गोयनका को अपने पद का गलत इस्तेमाल करने और फंड की हेराफेरी का दोषी पाया था। इसके चलते बाजार नियामक ने पुनीत गोएनका को किसी भी लिस्टेड कंपनी में एग्जेक्यूटिव या डायरेक्टर पोजिशन लेने पर रोक लगा दिया है।