श्रेई इक्विपमेंट फाइनेंस (Srei Equipment Finance) के एडमिनिस्ट्रेटर को ट्रांजैक्शन ऑडिटर से वित्त वर्ष 2020 और 2021 में कई फ्रॉड वाले ट्रांजैक्शन की रिपोर्ट मिली है। कंपनी ने बताया कि इन ट्रांजैक्शन से श्रेई ग्रुप (Srei Group) के साथ करीब 3,025 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी हुई है।
बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पिछले साल अक्टूबर की शुरुआत में श्रेई इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस लिमिटेड (SIFL) और उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी कंपनी श्रेय इक्विपमेंट फाइनेंस लिमिटेड (SEFL) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर को भंग कर एक एडमिनिस्ट्रेटर यानी प्रशासक नियुक्त किया था।
इसके बाद RBI ने संकट में फंसी दोनों कंपनियों के एडमिनिस्ट्रेटर की मदद के लिए 3-सदस्यीय सलाहकार समिति की नियुक्ति की थी। बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) के पूर्व चीफ जनरल मैनेजर रजनीश शर्मा को श्रेई ग्रुप की कंपनियों के मामलों को देखने के लिए प्रशासक नियुक्त किया गया था।
ग्रुप ने शेयर बाजार को भेजी जानकारी में बताया कि BDO इंडिया LLP (ट्रांजैक्शन ऑडिटर) नाम की एक पेशेवर एजेंसी इस मामले की जांच कर रही है। यह जांच इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्ट्सी (IBC) कोड 2016 की धारा 43 से 51 और धारा 65 और 66 के तहत की जा रही है।
श्रेय ग्रुप की कंपनियां लॉकडाउन के दौरान खुद को संभाल नहीं पाई और वह बैंकों को कर्ज लौटा पाने में नाकाम रही। अप्रैल में पंजाब एंड सिंध बैंक (Punjab & Sind Bank) ने रिजर्व बैंक को बताया है कि श्रेई ग्रुप की कंपनियों को दिया गया लोन कंपनी नहीं लौटा रही है। पंजाब एंड सिंध बैंक ने बताया कि श्रेई ग्रुप की कंपनियों को 1234 करोड़ रुपए का लोन दिया गया था जो अब फ्रॉड की कैटेगरी में है।