BharatPe cofounder Ashneer Grover : भारतपे के कोफाउंडर अशनीर ग्रोवर ने फिनटेक स्टार्टअप (fintech startup) में अपनी 9.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए इनवेस्टर्स से बातचीत शुरू कर दी है। इकोनॉमिक टाइम्स ने दो सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि इससे संभावित रूप से उनके कंपनी से बाहर निकलने का रास्ता बन सकता है।
ऑडियो लीक के बाद से बदले हालात
ग्रोवर ने भारतपे में चल रही जांच और एक स्वतंत्र ऑडिट के बीच बिक्री के लिए बातचीत शुरू की है, जिसमें स्टार्टअप में वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।
कंपनी और उसके फाउंडर के बीच एक ऑडियो के लीक होने के बाद एक महीने से कॉरपोरेट टकराव की स्थिति बनी हुई है। उस वीडियो में ग्रोवर ने कथित रूप से कोटक महिंद्रा बैंक के एक कर्मचारी से अभद्र भाषा में बातचीत की थी।
...खुद ही कंपनी से बाहर हो सकते हैं ग्रोवर
इस सेकेंडरी सेल से संकेत मिलते हैं कि मौजूदा जांच के अंतिम निष्कर्ष जमा होने के साथ ही ग्रोवर खुद ही कंपनी से बाहर हो जाएंगे। इससे पहले 31 जनवरी को खबर आई थी कि फाउंडर, भारतपे बोर्ड और कंपनी के शेयरहोल्डर्स के बीच दूरियां बढ़ने के बीच ऐसे हालात की आशंका में ग्रोवर ने कुछ वकीलों को नियुक्त किया है। इस घटनाक्रम से जुड़े दो लोगों ने कहा कि ग्रोवर कंपनी के बोर्ड के सामने जांच के निष्कर्ष आने से पहले स्टेक सेल की तैयारी में हैं।
कम वैल्युएशन पर हो सकते हैं राजी
दिल्ली बेस्ड कंपनी की मौजूदा वैल्युएशन लगभग 2.8 अरब डॉलर है। कंपनी छोटे कारोबारियों ऑफलाइन मर्चेंट्स को फाइनेंशियल सर्विसेज देकर मदद करती है।
घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक अन्य शख्स ने कहा, “भले ही ग्रोवर पूरी कीमत (मौजूदा वैल्युएशन) पर अपनी स्टेक की पेशकश कर रहे हैं, लेकिन वह लगभग 1 अरब डॉलर वैल्युएशन पर राजी हो सकते हैं। हालांकि पिछले महीने के घटनाक्रमों को देखते हुए खरीदार तलाशना आसान काम नहीं होगा।”
मुख्य इनवेस्टर्स के पास पहले इनकार का अधिकार
सूत्रों के मुताबिक, ग्रोवर अपनी स्टेक को मोनेटाइज करने की कोशिश में कम कीमत पर अपने शेयर बेच सकते हैं। एक शख्स ने फिनटेक कंपनी में किसी मौजूदा शेयरहोल्डर्स के ज्यादा स्टेक खरीदने की कम संभावना जाहिर करते हुए कहा, “उन्होंने (अशनीर) ने अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए कई इनवेस्टर्स से बातचीत शुरू की है, लेकिन मुख्य इनवेस्टर्स को फाउंडर के शेयरों के लिए राइट ऑफ फर्स्ट रिफ्यूजल (आरओएफआर) है। उन्हें मंजूरियों की जरूरत होगी, जो काफी अहम होगी।”