यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल कर चुकी फिनटेक फर्म भारतपे (BharatPe) ने मुंबई मुख्यालय वाली नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC), ट्रिलियन लोन्स (Trillion Loans) की 51% हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया है। ट्रिलियन लोन्स, छोटे कारबारियों को कई विभिन्न तरह के सुरक्षित और असुरक्षित लोन देती है। साथ ही यह रिटेल ग्राहकों को ऑटो, गोल्ड और एजुकेशन लोन ऑफर करती है। इस अधिग्रहण के साथ ही भारतपे, उन फिनटेक कंपनियों की लिस्ट में शामिल हो गई है, जिन्होंने क्रेडिट मार्केट में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने के लिए हाल ही में कुछ NBFC का अधिग्रहण किया है। इनमें क्रेड, यूनि और लेंडिंगकार्ट जैसे फर्म शामिल हैं।
NBFC के अधिग्रहण का चलन इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि हाल में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने नियमों में कुछ कड़ाई की है। इसके चलते फिनटेक कंपनियों के लिए बिना NBFC लाइसेंस के डिजिटल लोन सेगमेंट में काम करना मुश्किल हो गया है।
भारतपे के को-फाउंडर और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर शाश्वत नकरानी ने बताया, 'ट्रिलियन लोन में कंट्रोलिंग हिस्सेदारी हासिल करना भारतपे ग्रुप के बड़े उद्देश्य के मुताबिक है। इससे हम बैंकिंग सुविधा से वंचित कारोबारियों और ग्राहकों तक पूंजी पहुंचाने में सक्षम होंगे।"
भारतपे और ट्रिलियन लोन्स के बीच यह डील अप्रैल में पूरा हुआ था। भारतपे ने कहा कि ट्रिलियन लोन एक स्वतंत्र इकाई के रूप में काम करेगी, जिसके पास बोर्ड की देखरेख में अपनी अलग टीम होगी।
यह अन्य फिनटेक फर्मों और कंपनियों के साथ साझेदारी के मौके भी तलाशेगी, जिससे यह विभिन्न वर्गों वाले कारोबारियों और ग्राहकों तक अपने क्रेडिट ऑफर के साथ पहुंच सके।
इसके अलावा BharatPe ने ट्रिलियन लोन्स में पर्याप्त राशि भी डाली है, जिससे इसे अपनी लोन बुक को बढ़ाने में मदद मिल सके। नाकरानी ने कहा, 'हमने 2019 में मर्चेंट लेंडिंग वर्टिकल लॉन्च किया था और पिछले तीन साल में इसमें तेजी से बढ़ोतरी हुई है। आज, हम अपने मर्चेंट पार्टनर्स को हर महीने 500 करोड़ रुपये से अधिक के लोन की सुविधा देते हैं।"