Byju's ने 6 जून को कर्ज देने वाली कंपनियों के खिलाफ कानूनी मामला दाखिल किया। इसमें कंपनियों पर बायजूज को नुकसान पहुंचाने (Predatory Practices) की कोशिशों का आरोप लगाया गया है। साथ ही बायजूज ने लोन पर 4 करोड़ डॉलर का इंटरेस्ट भी नहीं चुकाया है। उसने कहा है कि उसने इंटरेस्ट का पेमेंट रोक दिया है, क्योंकि टर्म लोन बी का मामला अब कोर्ट में है। इसके कुछ ही दिन बाद बायजूज के तीन डायरेक्टर्स ने इस्तीफे दे दिए। इनमें Peak XV Partners के जीवी रविशंकर, Chen Zuckerberg के Vivian Wu और Prosus के Rusell Dreisenstock शामिल थे। बायजूज इंडिया का सबसे ज्यादा वैल्यूएशन वाला स्टार्टअप है। यह दुनिया की सबसे मूल्यवान एडटेक कंपनी है।
पिछले कई महीनों से टकराव की स्थिति
सूत्रों का कहना है कि कर्ज देने वाली कंपनियों के खिलाफ कोर्ट में मामला दाखिल करना संभवत: बायजूज का आखिरी हथियार है। कंपनी के चलाने के तरीकों को लेकर पिछले कई महीनों से टकराव की स्थिति बनी हुई थी। बताया जाता है कि बोर्ड के सदस्य अपनी जिम्मेदारी से भी बचना चाहते थे। इंडिया में कंपनी से जुड़े कानूनों में बोर्ड के डायरेक्टर्स की काफी ज्यादा जिम्मेदारी होती है। अब तक बायजूज ने फाइनेंशियल ईयर 2021-22 के अपने रिजल्ट पेश नहीं किए हैं। रिजल्ट घोषित करने में एक सीमा से ज्यादा देर होने पर कंपनी के डायरेक्टर्स पर जुर्माना लगाया जाता है। इससे कंपनी के डायरेक्टर्स की छवि को बहुत नुकसान पहुंचता है।
कंपनी ने 18 जून को इस्तीफों के बारे में बताया
मनीकंट्रोल ने बायजूज से डायरेक्टर्स की कथित नाराजगी और उनके संभावित इस्तीफे के बारे में सवाल पूछे थे। कंपनी ने इन आरोपों को खारिज किया था। कंपनी के फाउंडर और सीईओ बायजू रवींद्रन ने कहा था कि कंपनी के बोर्ड की मीटिंग 5 जून को हुई थी। इसमें कंपनी की यूनिट Aakash Educational Services का आईपीओ लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। लेकिन, कहां जाता है कि जहां धुआं होता है वहां आग भी होती है। सूत्रों ने बताया कि डायरेक्टर्स के इस्तीफे जून के पहले और दूसरे हफ्तों में हुए। इस बारे में कंपनी के करीब 50 फीसदी शेयरधारकों को 18 जून को बताया दिया गया। बायजूज के इन खबरों को खारिज करने के बाद निवेश करने वाली कंपनियों ने 23 जून को अलग से बयान जारी किए।
रवींद्रन से कोई सवाल नहीं पूछता था
पिछले एक साल से बायजूज के बोर्ड के स्वतंत्र निदेशक कंपनी के कामकाज को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने की मांग कर रहे थे। बताया जाता है कि रवींद्रन की कोशिश ज्यादातर फैसले खुद लेने की होती है। वह फंड जुटाने, कंपनी के कामकाज और कम्युनिकेशन तक का कंट्रोल अपने पास रखना चाहते हैं। बायजूज में हिस्सेदारी रखने वाली एक कंपनी से जुड़े सूत्र ने बताया, "सिर्फ उन्हें पता है कि कंपनी में क्या चल रहा है। उनसे शायद ही कभी सवाल पूछे जाते हैं। इसकी वजह यह है कि उन्होंने 22 अरब डॉलर का बड़ा बिजनेस खड़ा किया है, जिसमें कई कंपनियां शामिल हैं। लोन देने वाली कंपनियों की चिंता दूर करने के मामले में रवींद्रन ने कभी बोर्ड के सदस्यों के साथ सहयोग नहीं किया।"