पिछले कुछ से स्टार्टअप के सामने फंडिंग की दिक्कतें थीं और अब यह औपचारिक तौर पर शुरू हो गया है। ब्रोकरेज फर्म जीरोधा (Zerodha) के को-फाउंडर निखिल कामत (Nikhil Kamath) के मुताबिक अब कैब, फूड डिलीवरी और अन्य चीजों पर डिस्काउंट पुरानी बातें होने वाली हैं। निखिल के मुताबिक अब ये सब महंगी होने वाली हैं और डिस्काउंट के जाने का समय आ गया है। उन्होंने इसे लेकर एक ट्वीट भी किया है। इस ट्वीट के साथ उन्होंने कुछ ग्राफ भी पोस्ट किए हैं। निखिल कामत के मुताबिक जिसे स्टार्टअप की फंडिंग को लेकर दिक्कतों को लेकर संदेह है तो उन्हें बंगलुरू की फटाफट यात्रा करनी चाहिए।
Zerodha के Nikhil Kamath ने क्या दिखाया है ग्राफ में
निखिल कामत ने अपने ट्वीट में चार ग्राफिकल रिप्रेजेंटेशन भी जोड़ा है। इसमें कई स्रोत के हवाले से बातें कही गई हैं। ब्रेन एंड कंपनी के हवाले से खुलासा हुआ है कि स्टार्टअप फंडिंग जून 2022 के बाद से लगातार गिर रहा है। जून 2022 में स्टार्टअप्स को 340 करोड़ डॉलर का फंड मिला था जो इस साल अप्रैल 2023 में गिरकर 98 करोड़ डॉलर पर आ गया। फंडिंग को लेकर दिक्कत क्यों बढ़ी, इसकी वजह रुस-यूक्रेन की जंग, ब्याज दरों में बढ़ोतरी, सप्लाई चेन में दिक्कत, टेक इंडस्ट्री में कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े इश्यू के चलते स्टार्टअप की फंडिंग में गिरावट आई है।
Tracxn के आंकड़ों के अनुसार अब अपने यहां फंडिंग की दिक्कतें स्पष्ट रूप से दिख रही हैं। मार्च तिमाही में सालाना आधार पर स्टार्ट-अप में निवेश में 75 फीसदी गिर गया। वहीं फंडिंग राउंड की संख्या भी समान अवधि में 816 से गिरकर 301 पर आ गई। सबसे बुरी तरह तो बाद के स्टेज की फंडिंग (सीरीज सी और उससे आगे) प्रभावित हुई। मार्च तिमाही में इसमें सालाना आधार पर 79 फीसदी की गिरावट आई। तिमाही आधार पर तो यह 23 फीसदी तक गिर गया। इस बीच शुरुआती दौर के राउंड में जनवरी-मार्च 2023 में तिमाही आधार पर 4 फीसदी की मामूली गिरावट लेकिन सालाना आधार पर 68 फीसदी की बड़ी गिरावट रही।
कुछ पॉजिटिव भी है रिपोर्ट में
रिपोर्ट के मुताबिक निराशाजनक स्थिति के बावजूद पिछले साल कुछ पॉजिटिव चीजें भी हुई हैं। मेट्रो शहरों के बाहर निवेश में 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा यूनिकॉर्न की संख्या के मामले में भारत चीन को पीछे छोड़ रहा है और इलेक्ट्रिक वेईकल्स (EVs) सेगमेंट में मौके बढ़ रहे हैं।